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स्पेशल स्टोरी:--ईरान–इजरायल तनाव का असर भारतीय उद्योगों पर, गैस संकट और महंगे कच्चे तेल से MSME सेक्टर में बढ़ी चिंता

 मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा 
मध्य-पूर्व में जारी ईरान–इजरायल युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे तौर पर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) सेक्टर के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जल्द ही ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति सामान्य नहीं हुई तो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में कमर्शियल LPG और PNG गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, जिसके कारण अनेक MSME इकाइयों के सामने उत्पादन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
गैस आपूर्ति में बाधा से उत्पादन प्रभावित
अमित उपाध्याय ने बताया कि पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, सिलिकॉन स्प्रे, केमिकल प्रोसेसिंग और कई अन्य छोटे-मध्यम उद्योगों की उत्पादन प्रक्रिया कमर्शियल एलपीजी और पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) पर निर्भर है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से कई औद्योगिक क्षेत्रों में गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति के कारण कई फैक्ट्रियां आंशिक रूप से बंद हो चुकी हैं, जबकि कई इकाइयां उत्पादन घटाने या अस्थायी रूप से बंद करने के लिए मजबूर हो रही हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इससे औद्योगिक उत्पादन और रोजगार दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कालाबाजारी से और बढ़ी परेशानी
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार बाजार में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी की शिकायतें भी मिल रही हैं। कई स्थानों पर सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए महंगे दामों पर गैस खरीदना आर्थिक रूप से बेहद कठिन हो जाता है।
अमित उपाध्याय का कहना है कि यदि उद्योगों को ऊंची कीमतों पर गैस खरीदनी पड़ती है तो उत्पादन लागत इतनी बढ़ जाती है कि मुनाफा लगभग समाप्त हो जाता है। वहीं दूसरी ओर यदि उद्योग बंद होते हैं तो फैक्ट्री का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन और बैंक ऋण की किश्त जैसे स्थायी खर्च उद्योगों के लिए गंभीर संकट पैदा कर देते हैं।
PNG कनेक्शन लेने वाले उद्योग भी असमंजस में
उन्होंने बताया कि हजारों उद्योगों ने पहले ही लाखों रुपये खर्च कर PNG पाइपलाइन कनेक्शन लिया था, ताकि उन्हें स्थिर और नियमित ऊर्जा आपूर्ति मिल सके। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में PNG आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
इसका असर केवल औद्योगिक इकाइयों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि होटल इंडस्ट्री, ढाबों और छोटे फूड स्टॉल पर भी पड़ सकता है। औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों श्रमिक इन छोटे भोजनालयों पर निर्भर रहते हैं। यदि गैस संकट के कारण ये बंद होते हैं तो श्रमिकों के लिए भोजन की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों से रॉ-मैटेरियल महंगा
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर औद्योगिक कच्चे माल (रॉ-मैटेरियल) पर भी पड़ रहा है। अमित उपाध्याय के अनुसार पॉलीमर सहित कई महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चे माल के दाम 40 से 45 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।
इससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है और छोटे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है। कई उद्योगों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे बढ़ती लागत के बीच उत्पादन कैसे जारी रखें।
MSME सेक्टर: अर्थव्यवस्था की रीढ़
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि MSME सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। कृषि के बाद यही क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है और देश की जीडीपी तथा निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
अमित उपाध्याय ने बताया कि केवल उत्तर प्रदेश में ही लगभग 96 लाख MSME इकाइयां कार्यरत हैं, जो करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में यदि ऊर्जा संकट के कारण इन उद्योगों की उत्पादन गतिविधियां प्रभावित होती हैं तो इसका असर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि एलपीजी और पीएनजी गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही बाजार में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अमित उपाध्याय ने कहा कि सरकार को MSME उद्योगों को ऊर्जा लागत में राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि उद्योगों की उत्पादन गतिविधियां बाधित न हों और रोजगार सुरक्षित रह सके।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर ऐसी रणनीति बनानी होगी जिससे ऊर्जा आपूर्ति स्थिर रहे और MSME सेक्टर को किसी बड़े आर्थिक संकट से बचाया जा सके।