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स्पेशल स्टोरी: ‘डिजिटल कंस्ट्रक्शन की नई क्रांति’—ITS इंजीनियरिंग कॉलेज में BIM पर एक्सपर्ट टॉक ने बदली सोच

🎓  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
तेजी से बदलती निर्माण तकनीकों के दौर में आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा ने छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम पहल की। सिविल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा संस्थान के इनोवेशन काउंसिल (IIC) के सहयोग से आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान में “निर्माण एवं परियोजना प्रबंधन में BIM की अनिवार्यता” विषय पर गहन चर्चा हुई।
🚀 स्पेशल एंगल: ‘ईंट-पत्थर से डिजिटल मॉडल तक’—कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री का बदलता चेहरा
यह व्याख्यान केवल एक अकादमिक गतिविधि नहीं था, बल्कि यह संकेत था कि
👉 निर्माण उद्योग अब पारंपरिक तरीकों से निकलकर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ओर बढ़ चुका है।
मुख्य वक्ता डॉ. अमित गोयल (डीन, IQAC, NICMAR दिल्ली) ने स्पष्ट किया कि:
“BIM (Building Information Modeling) केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि एक पूरी प्रक्रिया है, जो प्रोजेक्ट को शुरुआत से अंत तक डिजिटल रूप में नियंत्रित करती है।”
🏗️ क्यों जरूरी हो गया है BIM?
डॉ. गोयल ने बताया कि वर्तमान निर्माण परियोजनाओं में अक्सर:
समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाता
लागत लगातार बढ़ती जाती है
अलग-अलग टीमों के बीच तालमेल की कमी रहती है
👉 BIM इन सभी समस्याओं का समाधान एक ही प्लेटफॉर्म पर देता है, जहां डिज़ाइन, प्लानिंग और एक्जीक्यूशन आपस में जुड़े होते हैं।
💡 BIM के ‘गेम चेंजर’ फायदे
विशेषज्ञ व्याख्यान में BIM के कई अहम लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया:
🤝 बेहतर समन्वय: आर्किटेक्ट, इंजीनियर और कॉन्ट्रैक्टर के बीच रियल टाइम सहयोग
👁️ एडवांस विज़ुअलाइजेशन: निर्माण से पहले पूरा प्रोजेक्ट 3D में देख पाना
⚠️ क्लैश डिटेक्शन: डिज़ाइन की गलतियों को पहले ही पहचान लेना
⏱️💰 समय और लागत में बचत: 4D (टाइम) और 5D (कॉस्ट) मॉडलिंग
🌱 सस्टेनेबिलिटी: संसाधनों का बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण
👉 यानी BIM न सिर्फ प्रोजेक्ट को तेज और सस्ता बनाता है, बल्कि गुणवत्ता और पारदर्शिता भी बढ़ाता है।
🎯 छात्रों के लिए ‘फ्यूचर रेडी’ स्किल्स
इस सत्र में 50 से अधिक छात्र और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए, जहां
छात्रों ने न सिर्फ नई तकनीक सीखी, बल्कि अपने सवालों के जरिए
इंडस्ट्री की वास्तविक चुनौतियों को भी समझा।
👉 यह व्याख्यान छात्रों को
जॉब मार्केट के लिए “फ्यूचर रेडी” बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ।
🏫 संस्थान की सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम की शुरुआत
डॉ. संजय यादव (विभागाध्यक्ष, CED एवं MED) के स्वागत भाषण से हुई।
श्री कुणाल सिंह ने वक्ता का परिचय कराया और सत्र का संचालन किया।
अंत में:
डॉ. संजय यादव एवं डॉ. हर्ष गुप्ता ने डॉ. गोयल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया
श्री समीर कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया
📊 बड़ा संदेश: इंडस्ट्री-एकेडमिक गैप हो रहा कम
इस तरह के विशेषज्ञ व्याख्यान यह दर्शाते हैं कि:
👉 कॉलेज अब केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि
इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार छात्रों को तैयार कर रहे हैं।
🔮 निष्कर्ष: ‘BIM ही भविष्य है’
आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज का यह आयोजन एक साफ संदेश देता है कि:
आने वाला समय डिजिटल कंस्ट्रक्शन का है
BIM जैसी तकनीकें निर्माण क्षेत्र की दिशा तय करेंगी
👉 अब सवाल यह नहीं कि BIM अपनाना है या नहीं,
बल्कि यह है कि इसे कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से अपनाया जाए।