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स्पेशल न्यूज़ स्टोरी:-- विश्व किडनी दिवस विशेष बदलती जीवनशैली से बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में अत्याधुनिक HDF डायलिसिस तकनीक की शुरुआत

   मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खान-पान, जिम और बॉडीबिल्डिंग के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट्स का बढ़ता चलन तथा मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों ने किडनी से जुड़ी समस्याओं को तेजी से बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में किडनी रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहा है। इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा ने विश्व किडनी दिवस (12 मार्च) के अवसर पर अत्याधुनिक नेक्स्ट-जेनरेशन हेमोडायफिल्ट्रेशन (HDF) मशीन की शुरुआत की है, जो किडनी रोगियों के लिए उन्नत और अधिक प्रभावी उपचार का विकल्प प्रदान करेगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो रक्त को शुद्ध करने, शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने और शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन को बनाए रखने का कार्य करती है। जब किडनी अपनी कार्यक्षमता खोने लगती है, तो शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण ही जीवन बचाने का विकल्प बन जाता है।
नई तकनीक से बेहतर डायलिसिस उपचार की उम्मीद
फोर्टिस ग्रेटर नोएडा द्वारा शुरू की गई हेमोडायफिल्ट्रेशन (HDF) तकनीक पारंपरिक डायलिसिस से अधिक उन्नत मानी जा रही है। इस तकनीक में डिफ्यूजन और हाई-वॉल्यूम कन्वेक्शन दोनों प्रक्रियाओं का संयोजन होता है, जिससे रक्त में मौजूद छोटे, मध्यम और कुछ बड़े आकार के टॉक्सिन्स को भी प्रभावी रूप से हटाया जा सकता है।
पारंपरिक हेमोडायलिसिस मुख्य रूप से छोटे आकार के विषैले तत्वों को हटाने में सक्षम होता है, जबकि HDF तकनीक रक्त को अधिक गहराई से शुद्ध करने में मदद करती है। इससे मरीजों में थकान, कमजोरी और अन्य डायलिसिस से जुड़े लक्षणों में कमी आती है और उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है।
गंभीर मरीज का सफल उपचार बना तकनीक की मिसाल
इस नई तकनीक की उपयोगिता का उदाहरण हाल ही में तब देखने को मिला जब अस्पताल के डॉक्टरों ने 32 वर्षीय एक महिला मरीज का सफल उपचार किया। मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट पहले ही हो चुका था, लेकिन प्रत्यारोपित किडनी ने काम करना बंद कर दिया था और वह डायलिसिस पर निर्भर हो गई थीं।
जब मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी, तेज बुखार था और उनका ब्लड प्रेशर भी खतरनाक रूप से गिर चुका था। डॉक्टरों के अनुसार उस समय मरीज के बचने की संभावना केवल 10 प्रतिशत ही रह गई थी।
इसके अलावा किडनी प्रत्यारोपण के बाद दी जाने वाली दवाओं के कारण उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली भी काफी कमजोर हो चुकी थी, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ गया था। मरीज की इस जटिल स्थिति को देखते हुए पारंपरिक डायलिसिस करना चुनौतीपूर्ण था।
ऐसे में डॉ. रविंदर सिंह भदोरिया, एडिशनल डायरेक्टर (नेफ्रोलॉजी) और डॉ. प्रशांत कुमार, कंसल्टेंट (यूरोलॉजी) के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने एडवांस हेमोडायफिल्ट्रेशन तकनीक का सहारा लिया। करीब चार घंटे तक चली इस प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति में सुधार देखा गया और फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
लाइफस्टाइल बीमारियां बन रहीं किडनी रोग का बड़ा कारण
डॉ. रविंदर सिंह भदोरिया का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में किडनी रोगों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें से अधिकतर मामले ऐसी जीवनशैली से जुड़े हैं जिनमें अनियमित खान-पान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन और नियमित स्वास्थ्य जांच की अनदेखी शामिल है।
उन्होंने बताया कि अनियंत्रित मधुमेह और उच्च रक्तचाप किडनी फेल होने के सबसे बड़े कारणों में शामिल हैं। यदि इन बीमारियों का समय पर इलाज न किया जाए तो धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता कम होती जाती है और अंततः मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है।
डॉ. भदोरिया ने लोगों से अपील की कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, संतुलित आहार लें और बिना चिकित्सकीय सलाह के प्रोटीन सप्लीमेंट्स का अत्यधिक सेवन न करें।
डायलिसिस से जुड़े जोखिमों को कम करती है HDF तकनीक
डॉ. प्रशांत कुमार के अनुसार ऑनलाइन हेमोडायफिल्ट्रेशन तकनीक पारंपरिक डायलिसिस से कई मायनों में बेहतर है। यह न केवल रक्त से अधिक मात्रा में विषैले तत्वों को निकालती है, बल्कि शरीर में सूजन और इंफ्लेमेशन को भी कम करती है।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक का उपयोग करने वाले मरीजों में डायलिसिस के दौरान ब्लड प्रेशर अधिक स्थिर रहता है, थकान और उलझन जैसे लक्षण कम होते हैं तथा लंबे समय तक डायलिसिस करवाने से होने वाली जटिलताओं का खतरा भी कम हो जाता है।
यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर हैं, जिन्हें हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक है या जिन्हें पारंपरिक डायलिसिस से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता।
उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के फैसिलिटी डायरेक्टर सिद्धार्थ निगम ने बताया कि अस्पताल लगातार आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। एचडीएफ तकनीक की शुरुआत से अस्पताल की नेफ्रोलॉजी और डायलिसिस सेवाएं और मजबूत होंगी।
उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल उपचार प्रदान करना ही नहीं, बल्कि मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता उपलब्ध कराना भी है। अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से गंभीर मरीजों को भी सुरक्षित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
जागरूकता की भी उतनी ही जरूरत
विश्व किडनी दिवस के अवसर पर डॉक्टरों ने यह भी जोर दिया कि किडनी रोगों से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, मधुमेह और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना तथा बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं और सप्लीमेंट्स का सेवन न करना किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी कदम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किडनी रोग का समय रहते पता चल जाए तो उचित उपचार के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज को डायलिसिस या प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रियाओं से बचाया जा सकता है।