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स्पेशल स्टोरी: ‘स्वच्छता का नया मॉडल’—ग्रेटर नोएडा में ‘सफाई मित्र सार्थक पहल’ से बदलेगी शहर की तस्वीर

🌿 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
स्वच्छता को सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी मानने की सोच को बदलते हुए ग्रेटर नोएडा में एक नए जनभागीदारी मॉडल की शुरुआत हुई है। सेक्टर अल्फा-2 से मंगलवार को ‘सफाई मित्र सार्थक पहल’ का आगाज हुआ, जो आने वाले समय में शहर की सफाई व्यवस्था को जमीनी स्तर से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह पहल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, अनुभूति वेलफेयर फाउंडेशन और फीडबैक फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई, जिसमें कॉर्पोरेट CSR (आईटेल) की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
🚀 सिर्फ अभियान नहीं, ‘सिस्टम चेंज’ की शुरुआत (स्पेशल एंगल)
अक्सर स्वच्छता अभियान फोटो और कार्यक्रमों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन यह पहल कई स्तरों पर सिस्टमेटिक बदलाव लाने का दावा करती है:
घर-घर कचरा पृथक्करण (Segregation) को बढ़ावा
कचरे के वैज्ञानिक निपटान पर जोर
सफाई मित्रों (Sanitation Workers) को सम्मान और सुविधा
शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार (MRF सेंटर, बॉटल कलेक्टर आदि)
👉 यानी यह पहल सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि पूरे वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को अपग्रेड करने का प्रयास है।
🧹 अल्फा-2 में दिखा ‘एक्शन मोड’
अभियान के शुभारंभ के मौके पर:
जागरूकता शिविर आयोजित किया गया
प्लॉगिंग ड्राइव (कचरा उठाने का अभियान) चलाया गया
अधिकारियों, RWA और नागरिकों ने खुद हाथों से कचरा उठाया
👉 करीब 3 घंटे में 500 किलोग्राम कचरा एकत्र कर उसे
गीला-सूखा अलग करके प्रोसेसिंग प्लांट भेजा गया।
👥 जनभागीदारी: ‘सरकार + समाज + कॉर्पोरेट’ का मॉडल
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत इसका ट्रिपल पार्टनरशिप मॉडल है:
🏢 प्राधिकरण (Government) – नीति और क्रियान्वयन
🤝 NGO (अनुभूति, फीडबैक) – जागरूकता और ग्राउंड कनेक्ट
🏭 कॉर्पोरेट (आईटेल) – CSR के जरिए संसाधन और सपोर्ट
👉 यह मॉडल अगर सफल होता है, तो इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है।
🏥 सिर्फ सफाई नहीं, सफाई मित्रों का सम्मान भी
अभियान के तहत:
सफाई कर्मियों के लिए हेल्थ चेकअप कैंप
उनके काम को सम्मान देने की पहल
बेहतर सुविधाओं और सुरक्षा पर जोर
👉 यह संदेश साफ है कि
“स्वच्छता के असली हीरो—सफाई मित्र—अब केंद्र में होंगे।”
🧠 इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
आने वाले समय में इस पहल के तहत:
शहर में बॉटल कलेक्टर मशीनें लगाई जाएंगी
ई-रिक्शा के जरिए जागरूकता अभियान
MRF (Material Recovery Facility) सेंटर की क्षमता बढ़ाई जाएगी
👉 इससे कचरे का रीसाइक्लिंग और मैनेजमेंट अधिक प्रभावी होगा।
🗣️ क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
प्राधिकरण के प्रधान महाप्रबंधक संदीप चंद्रा ने कहा:
“स्वच्छता की शुरुआत घर से होती है। हर नागरिक को कचरे का पृथक्करण और उसके वैज्ञानिक निपटान की जिम्मेदारी लेनी होगी।”
वहीं, आईटेल इंडिया के CEO अरिजीत तलपत्रा ने कहा:
“यह पहल समाज के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और भारत को सशक्त बनाने के प्रयासों का प्रतीक है।”
📊 क्यों जरूरी है यह पहल?
ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में:
कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ रही है
पारंपरिक सिस्टम पर दबाव है
नागरिकों की भागीदारी अभी भी सीमित है
👉 ऐसे में यह पहल सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट की दिशा में अहम कदम है।
🔮 निष्कर्ष: ‘स्वच्छता अब आदत बनेगी या अभियान ही रहेगी?’
‘सफाई मित्र सार्थक पहल’ ने एक मजबूत शुरुआत तो कर दी है, लेकिन असली चुनौती होगी:
क्या लोग इसे अपनी दैनिक आदत बनाएंगे?
क्या सिस्टम लंबे समय तक सक्रिय और प्रभावी रहेगा?
👉 अगर यह मॉडल सफल होता है, तो ग्रेटर नोएडा सिर्फ एक स्मार्ट सिटी नहीं, बल्कि
“सस्टेनेबल और जिम्मेदार शहर” के रूप में भी पहचान बना सकता है।