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गलगोटिया विश्वविद्यालय में बाल संरक्षण कानून पर अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, अमेरिकी प्रोफेसर ने साझा किया वैश्विक अनुभव

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / यीडा सिटी 
ग्रेटर नोएडा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विधि शिक्षा और शोध को सशक्त बनाने की दिशा में गलगोटिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल देखने को मिली। विश्वविद्यालय में पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका की प्रतिष्ठित प्रोफेसर लूसी जॉनस्टन-वाल्श द्वारा तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 170 विद्यार्थियों और अध्यापकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
“यू.एस. चाइल्ड प्रोटेक्शन सिस्टम एंड लॉज़ः डिफाइनिंग एब्यूज, मेंडेटरी रिपोर्टिंग एंड लीगल रिप्रेजेंटेशन ऑफ यूथ इन जुवेनाइल कोर्ट प्रोसीडिंग्स” विषय पर आधारित इस विशेष पाठ्यक्रम में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, कानूनी संरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन चर्चा की गई।
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विशेष फोकस
प्रोफेसर लूसी जॉनस्टन-वाल्श ने अपने व्याख्यान में अमेरिकी बाल संरक्षण प्रणाली (यू.एस. चाइल्ड प्रोटेक्शन सिस्टम) की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ होने वाले शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार की पहचान किस प्रकार की जाती है और ऐसे मामलों में कानूनी व्यवस्था किस तरह सक्रिय भूमिका निभाती है।
उन्होंने मेंटडेटरी रिपोर्टिंग (अनिवार्य रिपोर्टिंग) की अवधारणा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कई देशों में शिक्षकों, डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि यदि उन्हें किसी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार का संदेह हो तो वे इसकी सूचना संबंधित एजेंसियों को दें।
किशोर न्यायालयों में कानूनी प्रतिनिधित्व की भूमिका
पाठ्यक्रम के दौरान किशोर न्याय प्रणाली में युवाओं को मिलने वाले कानूनी प्रतिनिधित्व के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रोफेसर लूसी ने बताया कि न्यायालय में बच्चों और किशोरों के अधिकारों की रक्षा के लिए वकीलों और न्यायिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
भारत और अमेरिका की प्रणालियों की तुलनात्मक समझ
इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू तुलनात्मक अध्ययन रहा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को भारत और अमेरिका की बाल संरक्षण प्रणालियों के बीच समानताओं और अंतर को समझने का अवसर मिला। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय कानून और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिली।
संवादात्मक सत्रों ने बढ़ाई विद्यार्थियों की भागीदारी
कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक सत्र के अंत में इंटरएक्टिव डिस्कशन आयोजित किए गए, जिसमें विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और विषय से जुड़े विभिन्न कानूनी व सामाजिक पहलुओं पर चर्चा की। इस संवादात्मक शैली ने शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बना दिया।
गलगोटिया विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण की सराहना
प्रोफेसर लूसी जॉनस्टन-वाल्श ने विश्वविद्यालय के आधुनिक बुनियादी ढांचे, शैक्षणिक वातावरण और एक्टिव लर्निंग इकोसिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि यहां विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और शोध के अवसर मिल रहे हैं।
पॉडकास्ट सत्र में साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों के ज्ञान का आकलन करने के लिए पाठ्यक्रम से संबंधित प्रश्नों का एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसके साथ ही प्रोफेसर लूसी जॉनस्टन-वाल्श के साथ एक विशेष पॉडकास्ट सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने गलगोटिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में अपने शिक्षण अनुभव साझा किए और विधि शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।
इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों को बाल संरक्षण कानून की वैश्विक समझ प्रदान की, बल्कि उन्हें न्याय, मानवाधिकार और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अधिक जागरूक भी बनाया।