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प्रकृति की सेवा को जीवन का लक्ष्य बना चुके हैं ‘ग्रीन मैन’ विनोद सोलंकी

विशेष फीचर स्टोरी:- वृक्षारोपण, जल संरक्षण और परोपकार के संदेश से समाज को कर रहे जागरूक
  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
 तेजी से बढ़ते शहरीकरण, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के दौर में पर्यावरण संरक्षण आज सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों में शामिल हो चुका है। कंक्रीट के जंगलों में बदलते शहर, लगातार गिरता भूजल स्तर, बढ़ता वायु और जल प्रदूषण मानव जीवन के लिए गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो व्यक्तिगत स्तर पर प्रकृति को बचाने की मुहिम में जुटे हुए हैं और समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-1 निवासी ‘ग्रीन मैन’ विनोद सोलंकी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल एक विचार नहीं बल्कि अपने जीवन का मिशन बना लिया है। उनका मानना है कि “हरा-भरा पर्यावरण ही मानव जीवन की असली सुरक्षा है और यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानव सभ्यता का भविष्य भी सुरक्षित रह सकेगा।”
प्रकृति के प्रति समर्पण बना जीवन का उद्देश्य
विनोद सोलंकी का जीवन प्रकृति के प्रति गहरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का उदाहरण है। उनका कहना है कि आज जिस गति से शहरों का विस्तार हो रहा है, उससे प्राकृतिक संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। पेड़ों की कटाई, जल स्रोतों का समाप्त होना और प्रदूषण का बढ़ता स्तर आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
इसी चिंता को देखते हुए उन्होंने अपने जीवन को वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता के लिए समर्पित कर दिया है। वे लगातार लोगों को यह संदेश देते हैं कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
गिरता भूजल स्तर बढ़ा रहा चिंता
ग्रीन मैन विनोद सोलंकी का कहना है कि पहले गांवों और शहरों में कुएं, तालाब और पारंपरिक जल स्रोत हुआ करते थे, जो प्राकृतिक जल संतुलन बनाए रखते थे। लेकिन समय के साथ इन जल स्रोतों की उपेक्षा हुई और भूजल का अत्यधिक दोहन शुरू हो गया।
विशेष रूप से एनसीआर क्षेत्र में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बड़ी-बड़ी इमारतों के निर्माण के दौरान बेसमेंट की खुदाई से निकलने वाला पानी अक्सर बिना उपयोग के बहा दिया जाता है।
विनोद सोलंकी का कहना है कि यह केवल पानी की बर्बादी नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट का संकेत है। यदि समय रहते जल संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में पानी की कमी एक बड़ा संकट बन सकती है।
प्लास्टिक और प्रदूषण से पर्यावरण को खतरा
पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में विनोद सोलंकी पॉलीथिन और प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग को भी गंभीर खतरा मानते हैं। उनका कहना है कि प्लास्टिक न केवल जल स्रोतों को प्रदूषित करता है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।
नदियों, नालों और जलाशयों में पहुंचने वाला प्लास्टिक जलीय जीवन के लिए भी घातक साबित हो रहा है। यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है।
भोजन की बर्बादी रोकने की अनोखी पहल
ग्रीन मैन विनोद सोलंकी केवल बड़े मुद्दों पर ही नहीं बल्कि जीवन की छोटी-छोटी आदतों पर भी ध्यान देते हैं। उनकी दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भोजन की बर्बादी रोकना है।
वे प्रतिदिन सुबह उठकर आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करते हैं और देखते हैं कि कहीं बचा हुआ भोजन इधर-उधर बिखरा हुआ तो नहीं पड़ा है। यदि उन्हें कहीं भोजन दिखाई देता है तो वे उसे समेटकर चिड़ियों और पशु-पक्षियों को खिलाते हैं।
उनका मानना है कि भोजन का सम्मान करना और उसे बर्बाद होने से बचाना भी मानवता और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
बीटा-1 का पार्क बना हरियाली की मिसाल
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-1 के ई-ब्लॉक स्थित पार्क की हरियाली आज स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। इस पार्क में लगे छायादार और फलदार पेड़ न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब आने का अवसर भी देते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पार्क की हरियाली बनाए रखने में ग्रीन मैन विनोद सोलंकी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि आज पार्क में पेड़-पौधे लहलहाते हुए दिखाई देते हैं।
पेड़ लगाना ही नहीं, उनकी देखभाल भी जरूरी
विनोद सोलंकी का कहना है कि आजकल वृक्षारोपण अभियान तो बहुत चलाए जाते हैं, लेकिन पौधों की देखभाल पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। वे मानते हैं कि पौधे लगाकर उन्हें जीवित रखना ही असली पर्यावरण सेवा है।
वे सरकार से अपील करते हैं कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर छायादार और फलदार पेड़ों का रोपण किया जाना चाहिए। वन क्षेत्रों में केवल नीम, कीकर और बबूल जैसे पेड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि ऐसे पेड़ भी लगाए जाने चाहिए जो पर्यावरण के साथ-साथ मानव जीवन के लिए भी उपयोगी हों।
पर्यावरण पर लिखी पुस्तक का मुख्यमंत्री ने किया विमोचन
ग्रीन मैन विनोद सोलंकी केवल जमीनी स्तर पर ही पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने इस विषय पर लोगों को जागरूक करने के लिए पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक पुस्तक की भी रचना की है।
इस पुस्तक में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण संतुलन और प्रकृति के महत्व जैसे विषयों को सरल और प्रेरणादायक भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
इस पुस्तक का विमोचन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ में किया गया था, जो विनोद सोलंकी के प्रयासों की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
शिक्षा से बढ़ेगी पर्यावरण के प्रति जागरूकता
विनोद सोलंकी का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण को केवल अभियानों तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे स्कूली शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
यदि बच्चों को बचपन से ही प्रकृति के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के बारे में शिक्षित किया जाए तो आने वाली पीढ़ियां अधिक जागरूक और जिम्मेदार बनेंगी।
“परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म”
विनोद सोलंकी का जीवन दर्शन केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। उनका प्रसिद्ध संदेश है — “परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है।”
वे लोगों से रक्तदान, नेत्रदान, किडनी दान और देहदान के लिए भी आगे आने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि मृत्यु के बाद शरीर का अंतिम संस्कार तो हो ही जाता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति देहदान करता है तो उसके शरीर के अंग जरूरतमंद लोगों के जीवन बचाने में काम आ सकते हैं और चिकित्सा शिक्षा के लिए भी उपयोगी साबित होते हैं।
विशेष बात यह है कि ग्रीन मैन विनोद सोलंकी स्वयं भी अपना देहदान करने का संकल्प ले चुके हैं।
हर व्यक्ति लगाए एक पौधा
विनोद सोलंकी का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या संस्था का काम नहीं है। यदि समाज का हर व्यक्ति यह संकल्प ले ले कि वह अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएगा और उसकी देखभाल करेगा, तो धरती को हरा-भरा बनाना मुश्किल नहीं होगा।
🌿 प्रेरणादायक संदेश:
ग्रीन मैन विनोद सोलंकी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि एक व्यक्ति दृढ़ संकल्प के साथ प्रकृति की सेवा में जुट जाए तो वह समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।