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ग्रामीण बेटियों के सपनों को मिल रही नई उड़ान: अस्तौली लाइब्रेरी में करियर मार्गदर्शन से तय हो रहे लक्ष्य, अंकित भाटी की पहल बनी प्रेरणा

   मौहम्मद इल्यास “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा
गौतमबुद्धनगर के ग्राम अस्तौली में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को लेकर एक सकारात्मक बदलाव की तस्वीर सामने आ रही है। गांव की अस्तौली लाइब्रेरी अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए करियर मार्गदर्शन और भविष्य निर्माण का केंद्र बनती जा रही है। यहां आयोजित एक विशेष मार्गदर्शन सत्र में छात्राओं को अपने जीवन का लक्ष्य तय करने और उसे हासिल करने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
इस पहल का नेतृत्व RWA फाउंडर और शिक्षक अंकित भाटी द्वारा किया जा रहा है। उनका मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को समय पर सही मार्गदर्शन, संसाधन और प्रेरणा मिल जाए तो वे भी शहरों की छात्राओं की तरह हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।
लाइब्रेरी बन रही बेटियों के सपनों की पाठशाला
कार्यक्रम के दौरान अंकित भाटी ने छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए उनके सपनों, रुचियों और करियर लक्ष्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बेटियों को पर्याप्त जानकारी और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता, जिसके कारण कई प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पातीं। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से अस्तौली लाइब्रेरी में समय-समय पर ऐसे मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने छात्राओं को बताया कि यदि वे अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से निर्धारित करें और निरंतर मेहनत के साथ पढ़ाई करें तो वे प्रशासनिक सेवाओं, चिकित्सा, शिक्षा, पुलिस, सेना, खेल और तकनीकी क्षेत्रों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।
बेटियों ने बताए अपने सपने
इस कार्यक्रम के दौरान कई छात्राओं ने खुलकर अपने सपनों के बारे में बात की। कुछ छात्राओं ने डॉक्टर बनने, कुछ ने शिक्षक और पुलिस अधिकारी बनने, तो कुछ ने प्रशासनिक सेवाओं में जाने की इच्छा व्यक्त की। अंकित भाटी ने उन्हें इन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अनुशासन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आज का समय बेटियों के लिए अवसरों का समय है। सरकार और समाज दोनों ही बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को भी इन अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।
ग्रामीण समाज में बदलती सोच का संकेत
अस्तौली में आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण समाज में बदलती सोच और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी संकेत देता है। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों और ग्रामीणों ने कहा कि पहले गांवों में बेटियों की पढ़ाई को लेकर उतना ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और लोग बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव में इस तरह की लाइब्रेरी और मार्गदर्शन कार्यक्रम लगातार चलते रहें तो कई बेटियां अपने सपनों को साकार कर सकती हैं।
सामाजिक पहल बन सकती है मिसाल
अंकित भाटी की यह पहल केवल अस्तौली गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आसपास के गांवों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के करियर मार्गदर्शन केंद्र और अध्ययन स्थल विकसित किए जाएं तो यह बच्चों, खासकर बेटियों के भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं।
अस्तौली लाइब्रेरी में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि यदि समाज के लोग स्वयं आगे आकर शिक्षा और जागरूकता के लिए पहल करें, तो ग्रामीण क्षेत्र में भी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में छात्राओं को नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया।