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योगी आदित्यनाथ की माता पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला गरमाया, हिंदू युवा वाहिनी ने पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन


मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्माता नजर आ रहा है। इस मामले को लेकर हिंदू युवा वाहिनी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। संगठन के पूर्व जिला अध्यक्ष चैनपाल प्रधान ने इस संबंध में गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।
हिंदू युवा वाहिनी की ओर से भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि बिहार के एक मौलाना अब्दुल्ला सलीम ने रमजान के दौरान आयोजित एक धार्मिक सभा में भाषण देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। बताया जा रहा है कि इस कथित भाषण का एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसे लेकर विवाद और भी बढ़ गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
मामले में दावा किया जा रहा है कि उक्त वीडियो में मौलाना द्वारा गौमांस और योगी आदित्यनाथ की माता को लेकर विवादित टिप्पणी की गई है। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, वैसे ही विभिन्न हिंदू संगठनों और भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली।
हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकार की आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां समाज में वैमनस्य और तनाव का माहौल पैदा कर सकती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।
पुलिस से की गई सख्त कार्रवाई की मांग
हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिला अध्यक्ष चैनपाल प्रधान ने पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा है कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक मंच से किसी के परिवार या माता के बारे में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना न केवल अनुचित है बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी घातक है।
उन्होंने मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करने से बचे।
हिंदू संगठनों में रोष
इस घटना के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं में रोष का माहौल बताया जा रहा है। कई कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ बताया है।
संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन किसी भी व्यक्ति या उसके परिवार के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। पुलिस द्वारा यदि इस मामले में शिकायत के आधार पर जांच शुरू की जाती है, तो आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।