BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts


 

मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल का संकट, ग्रेटर नोएडा के उद्योगों पर गहराया असर


🟦 पैकेजिंग इंडस्ट्री पर सबसे बड़ा झटका, MSME सेक्टर संकट में; IBA ने सरकार से राहत पैकेज और ठोस कदमों की मांग की
🎤 एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास “दनकौरी” | Vision Live News / ग्रेटर नोएडा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर सीधा दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर अब उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र ग्रेटर नोएडा में भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।
Vision Live News की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA), ग्रेटर नोएडा के पदाधिकारियों ने उद्योगों के सामने खड़ी गंभीर चुनौतियों को विस्तार से रखा।
IBA के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी इजाफा हुआ है। डीजल-पेट्रोल महंगे होने से कच्चे माल की ढुलाई महंगी हो गई है, जिससे उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। साथ ही, डीजल आधारित मशीनों और जनरेटर के संचालन पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से पैकेजिंग इंडस्ट्री पर पड़े प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि प्लास्टिक, पॉलिमर और अन्य पैकेजिंग सामग्री कच्चे तेल के उत्पादों से तैयार होती हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में दिक्कत के कारण इन कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इससे उत्पादन बाधित हो रहा है और कई इकाइयों के सामने संचालन जारी रखना मुश्किल हो गया है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कुछ उद्योगों के बंद होने का खतरा भी पैदा हो गया है।
IBA के उपाध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर MSME सेक्टर पर पड़ रहा है। सीमित संसाधनों के कारण छोटे उद्योग बढ़ती लागत को झेल नहीं पा रहे हैं, जिससे उन्हें उत्पादन घटाना पड़ रहा है। इसका सीधा असर रोजगार पर भी पड़ने की आशंका है।
कोषाध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है। निर्यात पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे साबित होंगे।
वहीं, युवा उद्यमी और जे.के. इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर आकाश चौहान ने कहा कि यह समय उद्योगों के लिए रणनीतिक बदलाव का है। उन्होंने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को अपनाने, लागत प्रबंधन को मजबूत करने और सप्लाई चेन को विविध बनाने पर जोर दिया।
उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि ईंधन पर करों में राहत, बिजली दरों में संतुलन, MSME सेक्टर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और सस्ती दरों पर ऋण जैसी सुविधाएं दी जाएं, ताकि उद्योग इस संकट से उबर सकें।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से महंगाई बढ़ेगी, जिससे आम जनता की क्रय शक्ति प्रभावित होगी और बाजार में मांग घट सकती है। इसका सीधा असर उद्योगों की उत्पादन क्षमता और विकास पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह तनाव अब स्थानीय उद्योगों के लिए गंभीर संकट का रूप लेता जा रहा है। ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के सामने यह एक बड़ी चुनौती है, जहां समय रहते ठोस नीतिगत फैसले और रणनीतिक बदलाव ही इस स्थिति से उबरने का रास्ता तय करेंगे।