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दनकौर के सरस्वती शिशु मंदिर में घोषित हुआ परीक्षा परिणाम, मेधावी छात्र-छात्राओं का भव्य सम्मान

 मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी" / गौतमबुद्धनगर
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबद्ध शिशु शिक्षा समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल, दनकौर में सत्र 2025–26 का वार्षिक परीक्षा परिणाम अत्यंत उत्साह, गरिमा और सांस्कृतिक वातावरण के बीच घोषित किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा गणमान्य अतिथियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय बन गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ। पूर्व छात्र परिषद के अध्यक्ष संदीप मांगलिक ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके उपरांत सरस्वती वंदना एवं लघु सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक और प्रेरणादायक स्वर प्रदान किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य देवदत्त शर्मा ने अपने संबोधन में बताया कि विद्या भारती का मुख्य उद्देश्य केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में “भैया-बहिन” की परंपरा के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में शिक्षा प्रदान की जाती है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।
परीक्षा परिणाम की घोषणा के साथ ही विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
सर्वश्रेष्ठ, आदर्श एवं अनुशासनप्रिय छात्र-छात्राओं को संदीप मांगलिक द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सर्वाधिक उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों को BDRD सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दनकौर के प्रधानाचार्य जय प्रकाश सिंह ने सम्मानित करते हुए नियमितता के महत्व पर प्रकाश डाला।
कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को अनिल मांगलिक द्वारा सम्मानित किया गया, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली।
विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार गोयल (रमेश मिष्ठान भंडार) ने भी विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अपने प्रेरक उद्बोधन में जय प्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच ही विद्यार्थी को उच्च शिखर तक पहुंचाती है।
वहीं, अनिल कुमार गोयल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, संस्कार और कड़ी मेहनत अनिवार्य हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों के सर्वांगीण विकास में विद्यालय के साथ सक्रिय सहयोग बनाए रखें।
इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य बंधु-बहनों की भूमिका की भी सराहना की गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने शिक्षकों को सम्मानित कर उनके समर्पण, परिश्रम और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रधानाचार्य देवदत्त शर्मा ने अपने समापन संबोधन में आगामी शैक्षिक सत्र 2026–27 के संबंध में जानकारी देते हुए नए प्रवेश की प्रक्रिया, पाठ्यक्रम की विशेषताओं तथा विद्यालय की उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यालय से जोड़ें।
कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों, अभिभावकों, अतिथियों एवं विद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया गया। राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत वातावरण में “वंदे मातरम्” के सामूहिक गान के साथ कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ।
इस अवसर ने न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित किया, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा, प्रेरणा और आत्मविश्वास भी प्रदान किया।