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महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन रहा आर्या फैशन्स, डीएम मेधा रूपम ने किया निर्माण इकाई का दौरा


 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / गौतमबुद्धनगर
 बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कौशल विकास और रोजगार के अवसर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी दिशा में कार्य कर रही संस्था आर्या फैशन्स का हाल ही में जिला अधिकारी मेधा रूपम (आईएएस) ने दौरा किया।
डीएम मेधा रूपम के इस दौरे ने संस्थान के कार्यों को नई पहचान देने के साथ-साथ वहां कार्यरत महिला कर्मचारियों और कारीगरों का उत्साह भी बढ़ाया। अपने निरीक्षण के दौरान उन्होंने आर्या फैशन्स की निर्माण इकाई का अवलोकन किया और वहां कार्यरत महिला कर्मचारियों, आर्टिशियंस और क्राफ्टमैन्स से बातचीत कर उनके कार्य अनुभव और प्रशिक्षण प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की।
अनस्किल्ड से स्किल्ड बनने की यात्रा
दौरे के दौरान डीएम ने देखा कि आर्या फैशन्स किस प्रकार अकुशल (अनस्किल्ड) महिलाओं को अवसर देकर उन्हें प्रशिक्षण के माध्यम से कुशल (स्किल्ड) कारीगर बना रहा है। यहां महिलाओं को पहले परीक्षण के माध्यम से चयनित किया जाता है और फिर उन्हें सिलाई, कढ़ाई, डिजाइनिंग और फैशन निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को संस्थान में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें।
डीएम ने की पहल की सराहना
जिला अधिकारी मेधा रूपम ने आर्या फैशन्स के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं देतीं बल्कि उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास भी प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रम, रोजगार मिशन और महिला सशक्तिकरण योजनाओं को सफल बनाने में निजी संस्थानों की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
हस्तशिल्प और स्थानीय प्रतिभा को मिल रहा मंच
आर्या फैशन्स के माध्यम से स्थानीय स्तर पर हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। यहां तैयार होने वाले उत्पादों में पारंपरिक भारतीय कला और आधुनिक फैशन डिजाइन का सुंदर संयोजन देखने को मिलता है। इससे स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को मंच मिल रहा है और हस्तनिर्मित उत्पादों को नई पहचान भी मिल रही है।
संस्थान के लिए प्रेरणादायक रहा दौरा
आर्या फैशन्स की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि जिला अधिकारी मेधा रूपम के दौरे से संस्थान की पूरी टीम को नई ऊर्जा मिली है।
उन्होंने कहा कि आर्या फैशन्स का उद्देश्य केवल फैशन उत्पादों का निर्माण करना नहीं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और हस्तशिल्प कला को प्रोत्साहित करना है। संस्था भविष्य में भी अधिक से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेष विश्लेषण
क्यों जरूरी है महिला सशक्तिकरण का यह मॉडल
भारत जैसे विकासशील देश में महिलाओं की बड़ी आबादी आज भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में अनेक महिलाएं प्रतिभाशाली होने के बावजूद अवसरों के अभाव में अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पातीं।
ऐसे में कौशल आधारित प्रशिक्षण और स्थानीय रोजगार के अवसर महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। जब किसी महिला को प्रशिक्षण के साथ रोजगार मिलता है तो उसका प्रभाव केवल उस महिला तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज पर सकारात्मक असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर समान रूप से उपलब्ध कराए जाएं तो देश की अर्थव्यवस्था में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
आत्मनिर्भरता से बढ़ता है आत्मविश्वास
महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा आधार आर्थिक आत्मनिर्भरता है। जब महिलाएं स्वयं कमाने लगती हैं तो उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने लगती हैं।
आर्या फैशन्स जैसे संस्थान इसी दिशा में एक स्थानीय मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं, जहां प्रशिक्षण, रोजगार और कला को एक साथ जोड़कर महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है।
सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम
इस प्रकार की पहलें केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि समाज में लैंगिक समानता, सम्मान और आत्मनिर्भरता की संस्कृति को भी बढ़ावा देती हैं।
गौतम बुद्ध नगर में आर्या फैशन्स द्वारा चलाया जा रहा यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि यदि सरकारी नीतियों के साथ निजी क्षेत्र की पहल जुड़ जाए तो महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकता है।