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विजय सिंह पथिक जयंती पर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा का भव्य आयोजन, देशभर से जुटे समाज के प्रतिनिधि


 मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में विजय सिंह पथिक जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा द्वारा एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी विचारक और किसान आंदोलनों के अग्रदूत विजय सिंह पथिक के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों तथा राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को विस्तार से याद किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने भाग लेकर पथिक जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विजय सिंह पथिक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान सेनानियों में से एक थे, जिन्होंने अपने साहस, लेखनी और संगठन क्षमता के माध्यम से देश में जनजागरण का कार्य किया। उनका जन्म 27 फरवरी 1882 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद में हुआ था। प्रारंभ से ही उनमें देशभक्ति और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने की भावना थी। वे एक प्रखर लेखक, कवि, पत्रकार और क्रांतिकारी विचारक थे। उन्होंने अपने लेखों, अखबारों, पुस्तकों और कविताओं के माध्यम से जनता को अंग्रेजी शासन और रियासतों के अत्याचारों के खिलाफ जागरूक करने का कार्य किया।
वक्ताओं ने बताया कि पथिक जी ने किसानों के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक आंदोलन चलाए। उन्होंने किसानों पर लगाए गए अन्यायपूर्ण करों और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। उनके नेतृत्व में चलाए गए किसान आंदोलन ने पूरे देश में एक नई चेतना पैदा की। बाद में देश के विभिन्न हिस्सों में जो किसान आंदोलन हुए, उनमें पथिक जी के विचारों और संघर्षों की प्रेरणा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी विजय सिंह पथिक के कार्यों और विचारों से अत्यंत प्रभावित थे। उन्होंने पथिक जी को अपने साथ वर्धा आश्रम ले जाकर वहां से अखबार निकालने का आग्रह किया था। पथिक जी ने लगभग एक वर्ष तक वर्धा से अखबार का प्रकाशन कर देश में जागरूकता फैलाने का कार्य किया। उस समय प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी जमनालाल बजाज ने भी उनके आंदोलनों में आर्थिक सहयोग दिया। पथिक जी ने हमेशा स्वतंत्र लेखन के माध्यम से समाज और देश की सेवा की और अपने विचारों से लोगों को प्रेरित किया।
बाद में विजय सिंह पथिक ने राजस्थान के अजमेर को अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं से अपने आंदोलनों का संचालन किया। उन्होंने कई रियासतों में किसानों पर लगाए गए अत्याचारपूर्ण करों और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। उनके प्रयासों के कारण किसानों को बड़ी राहत मिली। पथिक जी ने राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की और राजपूताना क्षेत्र में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने का कार्य किया। इतना ही नहीं, उन्होंने “राजपूताना” नाम के स्थान पर “राजस्थान” शब्द को पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आज पूरे प्रदेश की पहचान बन चुका है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री (कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा मंत्रालय) जयंत चौधरी रहे। अपने संबोधन में उन्होंने विजय सिंह पथिक के योगदान को याद करते हुए कहा कि पथिक जी ने किसानों, मजदूरों और आम जनता के अधिकारों के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्वों के जीवन से सीख लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
जयंत चौधरी ने युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बदलते समय में तकनीक और ज्ञान ही युवाओं को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी युवाओं को तकनीक और शिक्षा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे पहले भी डंकौर क्षेत्र के विकास के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये की सहायता राशि दे चुके हैं और भविष्य में भी समाज और युवाओं के हित में जो संभव होगा, वह करते रहेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरिश्चंद्र भाटी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विजय सिंह पथिक केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान विचारक और समाज सुधारक भी थे। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को उनके आदर्शों पर चलकर एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
इस अवसर पर महासभा के संरक्षक डॉ. यशवीर सिंह गुर्जर की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि पथिक जी का जीवन त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही समाज और देश को मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने इतिहास और महान नेताओं के संघर्षों को जानें और उनसे प्रेरणा लेकर समाज के विकास में योगदान दें।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जयंत चौधरी का समाज की ओर से पगड़ी पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। इस दौरान मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का भी सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में महासभा के कई प्रमुख पदाधिकारी और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष साविंदर भाटी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के.पी. कसाना, जयप्रकाश विकल्प, महासचिव रामकेश चपराना, डॉ. जिले राम, राजपाल कसाना, कालू लाल गुर्जर, पंकज रौसा, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुनील, जिला अध्यक्ष अशोक भाटी, राष्ट्रीय लोकदल के जिला अध्यक्ष जनार्दन भाटी, नेशनल कोऑर्डिनेटर नामित भाटी सहित अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर, सांसद चंदन सिंह, पूर्व सांसद मलूक नागर तथा दादरी विधायक तेजपाल नागर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने भी विजय सिंह पथिक के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए समाज के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेष रूप से बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर जनपद से हजारों की संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। महिलाओं ने विजय सिंह पथिक के सम्मान में पारंपरिक गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।
कार्यक्रम के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने घोषणा की कि आगामी 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर “सरदार पटेल सामाजिक चेतना रैली” का आयोजन किया जाएगा। इस रैली में गुर्जर समाज के एक लाख से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रहित, समाजहित और विजय सिंह पथिक के आदर्शों पर चलने के संकल्प के साथ किया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि पथिक जी के विचार और उनका संघर्ष आज भी समाज को एकजुट करने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करते हैं।