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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जीएनआईओटी एमबीए संस्थान में पैनल चर्चा

शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और कानूनी जागरूकता को बताया महिला सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला
   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नॉलेज पार्क-2 स्थित जीएनआईओटी एमबीए संस्थान में महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक समानता को केंद्र में रखकर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) और इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसका विषय था – “महिलाओं को शिक्षित, सशक्त और उन्मूलन”। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज के बीच महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इस दिशा में शिक्षा और सामाजिक भागीदारी की भूमिका को रेखांकित करना था।
कार्यक्रम का शुभारम्भ डा. सपना आर्य (शिक्षाविद एवं समाज सुधारक, संस्थापक – वेदिका फाउंडेशन), मिस गुंजन मिश्रा (ह्यूमन रिसोर्स, एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट – कोरोहेल्थ) तथा संस्थान के निदेशक डा. अंशुल शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर पैनल विशेषज्ञों ने महिलाओं की शिक्षा, सामाजिक अधिकार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और कार्यस्थल पर समान अवसर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि शिक्षा महिला सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी और स्थायी माध्यम है। शिक्षा न केवल महिलाओं को ज्ञान प्रदान करती है बल्कि उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करती है। शिक्षित महिला अपने परिवार और समाज दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज के समय में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा और अवसरों का अंतर महिलाओं के विकास में बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस अंतर को कम करने के लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराना समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके साथ ही महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी, तभी वे समाज में समानता और न्याय के लिए मजबूती से खड़ी हो सकेंगी।
पैनल विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि तकनीकी शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण आज के दौर में महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्टार्टअप और ऑनलाइन उद्यमिता के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। इसलिए युवतियों को तकनीकी शिक्षा और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे समाज के समग्र विकास का आधार है। जब महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार, समाज और देश की प्रगति की गति भी तेज होती है।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डा. अंशुल शर्मा ने सभी पैनल विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि जीएनआईओटी संस्थान शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करने के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहता है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के विषय पर आयोजित यह पैनल चर्चा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रही।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी अतिथियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थान के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे और चर्चा में सक्रिय भागीदारी की।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस पैनल चर्चा ने विद्यार्थियों को न केवल महिला अधिकारों और सशक्तिकरण के महत्व से परिचित कराया, बल्कि उन्हें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित भी किया। ऐसे कार्यक्रम शिक्षा संस्थानों को केवल ज्ञान का केंद्र ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के मंच के रूप में भी स्थापित करते हैं।