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गलगोटिया विश्वविद्यालय में वैश्विक बौद्धिक संपदा कानून पर अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम सम्पन्न

विशेष स्टोरी:--विद्यार्थियों को अमेरिका और भारत के आईपीआर कानूनों की मिली गहन जानकारी, करियर के नए अवसरों पर हुआ मंथन
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ यीडा सिटी
तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) की बढ़ती महत्ता को ध्यान में रखते हुए गलगोटिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में “वैश्विक बौद्धिक संपदा कानून का व्यवहारिक पक्ष” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम 10 मार्च से 12 मार्च 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्धिक संपदा कानून की जटिलताओं और संभावनाओं से अवगत कराया गया।
इस कार्यक्रम में अमेरिका के प्रतिष्ठित पेन स्टेट डिकिन्सन लॉ के एसोसिएट क्लीनिकल प्रोफेसर और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ क्लिनिक के निदेशक प्रोफेसर जोनाथन डी’ सिल्वा ने बतौर मुख्य वक्ता विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था की समझ साझा करते हुए छात्रों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया।
पाठ्यक्रम में स्कूल ऑफ लॉ के बीए एलएलबी, बीबीए एलएलबी, एलएलबी (तीन वर्षीय) और एलएलएम कार्यक्रमों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा कानून की संरचना, उसके अनुप्रयोग और इस क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं की व्यापक जानकारी देना था।
कार्यक्रम के पहले दिन प्रोफेसर डी’ सिल्वा ने भारत और अमेरिका के बौद्धिक संपदा कानूनों की तुलनात्मक व्याख्या की। उन्होंने विशेष रूप से पेटेंट और ट्रेडमार्क कानूनों की संरचना, उनकी कानूनी प्रक्रिया और व्यावसायिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि नवाचार, तकनीकी विकास और ब्रांड सुरक्षा के लिए इन कानूनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती जा रही है।
दूसरे दिन उन्होंने अमेरिका में बौद्धिक संपदा वकील बनने की प्रक्रिया, आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, लाइसेंसिंग और व्यावहारिक अनुभव की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक कंपनियों और तकनीकी संस्थानों में आईपीआर विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
तीसरे और अंतिम दिन का सत्र विशेष रूप से विद्यार्थियों के करियर मार्गदर्शन पर केंद्रित रहा। इस दौरान प्रोफेसर डी’ सिल्वा ने विदेशों में बौद्धिक संपदा कानून के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों, अनुसंधान, इंटर्नशिप और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए खुद को तैयार करने और शोध आधारित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए प्रश्नोत्तर सत्रों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम ने छात्रों को न केवल कानून के सैद्धांतिक पहलुओं से परिचित कराया, बल्कि उन्हें वैश्विक कानूनी व्यवस्था, नवाचार संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय करियर संभावनाओं की नई दिशा भी दिखाई।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा और अनुभव प्रदान किए जाते रहेंगे।