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स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज का संदेश: प्रदूषण रोकें, कुरीतियों को दूर करें

सूरजपुर स्थित आर्य समाज मंदिर में  64वां वार्षिक सम्मेलन एवं चतुर्वेद शतकम यज्ञ 21 से 23 मार्च 2026 तक अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के साथ भव्य रूप से संपन्न

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित आर्य समाज मंदिर में महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती के पावन अवसर पर 64वां वार्षिक सम्मेलन एवं चतुर्वेद शतकम यज्ञ 21 से 23 मार्च 2026 तक अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। “यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म” के मूल संदेश को आत्मसात करते हुए आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण का भी सशक्त संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन यज्ञ एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर अपने जीवन में शुद्धता, सकारात्मकता और पर्यावरण संतुलन की कामना की। इसके साथ ही वेद पाठ, प्रवचन, राष्ट्र रक्षा सम्मेलन, युवा जागृति सम्मेलन, समाज सुधार गोष्ठियां तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती के जीवन चरित्र पर आधारित विशेष सत्रों का क्रम निरंतर चलता रहा। प्रत्येक सत्र में विद्वानों ने वैदिक धर्म, नैतिक मूल्यों और सामाजिक एकता पर अपने विचार रखे।
इस पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु रहे क्रांतिकारी एवं अंतर्राष्ट्रीय संत स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज (जयपुर), जिनका ओजस्वी उद्बोधन श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। स्वामी जी ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की सबसे गंभीर समस्या—बढ़ते प्रदूषण—पर गहन चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मानव ने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर नहीं रखा, तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने होंगे।
उन्होंने यज्ञ की महत्ता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाते हुए कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पर्यावरण शुद्धि का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण करने और स्वच्छता को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
स्वामी सच्चिदानंद जी ने अपने विचारों में भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों—जैसे अंधविश्वास, जातीय भेदभाव, सामाजिक असमानता और नैतिक पतन—पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज इन बुराइयों से मुक्त नहीं होगा, तब तक सच्चे अर्थों में प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने वैदिक शिक्षा, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को अपनाने पर जोर देते हुए विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज सुधार के अभियान में अग्रणी भूमिका निभाएं और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।
कार्यक्रम में यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य राजकुमार शास्त्री (करावल नगर, दिल्ली) के निर्देशन में वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए। वेदपाठी नवनीत शास्त्री एवं राकेश शास्त्री (गुरुकुल गौतम नगर, दिल्ली) ने वेद मंत्रों के माध्यम से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। आचार्य जयेन्द्र शास्त्री (गुरुकुल नोएडा) एवं आचार्य करण सिंह शास्त्री (ग्रेटर नोएडा) ने वैदिक ज्ञान और जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
भजनोपदेशिका बहन अमृता आर्य (दिल्ली), भजनोपदेशक कैलाश कर्मठ (कलकत्ता) एवं घनश्याम प्रेमी आर्य (मुजफ्फरनगर) ने भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत हो गया।
सम्मेलन में अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से डॉ. महेश शर्मा (सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री), तेजपाल सिंह नागर (विधायक दादरी), श्रीचंद शर्मा (एमएलसी), डॉ. राकेश आर्य (जिला अध्यक्ष), देवमुनि जी, वीरेश भाटी, रंगीलाल आर्य, ज्ञानेन्द्र आर्य, डॉ. डी.के. गर्ग सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर, रामेश्वर सरपंच, महेंद्र सिंह आर्य, देवेंद्र आर्य (एडवोकेट), अजब सिंह प्रधान, धर्मवीर प्रधान एवं ओमवीर आटी सहित अन्य विशिष्ट जन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
आर्य समाज मंदिर के संरक्षक मंडल—पं. महेंद्र कुमार आर्य, डॉ. धनीराम देवधर, बिजेंद्र सिंह आर्य, जयदेव शर्मा, ओमप्रकाश नेताजी—ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यकारिणी में अध्यक्ष पंडित मूलचंद आर्य, मंत्री पं. धर्मवीर आर्य, कोषाध्यक्ष पं. शिवदत्त आर्य, ऑडिटर पं. शिवकुमार आर्य, प्रचार मंत्री सतपाल आर्य, उप प्रचार मंत्री सुभाष आर्य, यशपाल आर्य, उप कोषाध्यक्ष अनिल शर्मा, अतुल शर्मा (एडवोकेट) सहित अन्य पदाधिकारियों ने अपने दायित्वों का कुशल निर्वहन करते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाया।
इसके अतिरिक्त रामजस आर्य, राजकुमार शर्मा, सुरेशचंद शर्मा, चौधरी ब्रह्मपाल आर्य, लक्ष्मीनारायण सिंघल, राहुल आर्य, शिवम शास्त्री, किताब सिंह आर्य, सुनील सौनिक, लौकेश आर्य, रविंद्र आर्य, अमन आर्य सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग देकर आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह तीन दिवसीय आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और वैदिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार का एक प्रभावशाली मंच बनकर उभरा। इसने समाज को एक सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य भी किया।