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स्पेशल स्टोरी:- ग्रेटर नोएडा के चूहड़पुर खादर में होली गायन प्रतियोगिता की धूम, कुटी मंदिर में गूंजे ब्रज के फाग और रसिया

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के ग्राम चूहड़पुर खादर स्थित प्राचीन कुटी मंदिर परिसर में आयोजित पारंपरिक होली गायन प्रतियोगिता ने पूरे क्षेत्र को रंग, उमंग और लोक संस्कृति की मधुर धुनों से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर ब्रज क्षेत्र की प्रसिद्ध फाग, रसिया और पारंपरिक होली गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय और उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम में दूर-दराज के गांवों से आए कलाकारों और मंडलियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
होली का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल रंगों का त्योहार ही नहीं बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रतीक भी है। चूहड़पुर खादर के कुटी मंदिर में आयोजित इस प्रतियोगिता में भी यही रंग देखने को मिला, जहां बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी ने उत्साह के साथ भाग लिया और पारंपरिक लोक गायन का आनंद लिया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मंडलियों ने ब्रज की पारंपरिक फाग और रसिया को अपने मधुर स्वरों में प्रस्तुत किया। ढोलक, हारमोनियम और मंजीरों की ताल पर गाए गए इन गीतों ने वातावरण को पूरी तरह होलीमय बना दिया। दर्शकों ने भी तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और कई स्थानों पर लोग स्वयं भी गीतों की धुन पर झूमते नजर आए।
इस अवसर पर कुटी मंदिर के महंत, दूर-दराज से आए संत समाज तथा बिरादरी के सरदारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और होली के इस सांस्कृतिक उत्सव का आनंद लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित संत समाज और वरिष्ठ जनों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। आज के आधुनिक दौर में जब नई पीढ़ी तेजी से बदलती जीवनशैली की ओर बढ़ रही है, तब ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है। इस तरह के सामूहिक आयोजनों से गांव और समाज के लोगों के बीच आपसी संबंध और अधिक मजबूत होते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर होली के गीतों का आनंद लिया और इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सहभागिता निभाई। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली मंडलियों ने अपनी कला और प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
प्रतियोगिता में इन टीमों ने मारी बाजी
होली गायन प्रतियोगिता में बेहतर प्रस्तुति देने वाली टीमों में महाशय बिशन, इंदौर (जिला अलवर, राजस्थान) की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं जित्ते नागर, तिगांव (जिला फरीदाबाद, हरियाणा) तथा अजब सिंह भाटी, ग्राम कौंडली (जिला गौतम बुद्ध नगर) की टीमों ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान हासिल किया।
इसके अलावा पंडित रामकुमार, ग्राम घरबरा (ग्रेटर नोएडा) और रिछपाल कैप्टन, तिगांव (जिला फरीदाबाद, हरियाणा) की टीमों को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। विजेता टीमों को आयोजकों द्वारा विशेष पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, संत समाज और ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि हमारी परंपराएं और लोक संस्कृति आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।
चूहड़पुर खादर के कुटी मंदिर में आयोजित यह होली गायन प्रतियोगिता केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लोक संस्कृति की जड़ें आज भी गांवों में गहराई से जुड़ी हुई हैं।