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त्योहार सबके लिए” : नन्हक फाउंडेशन की पहल ने झुग्गी बस्तियों में भरे उम्मीद के रंग, साधना सिंन्हा का प्रेरक उद्बोधन बना कार्यक्रम का केंद्र बिंदु

🌈 “ मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
सेक्टर ईटा वन स्थित नन्हक फाउंडेशन के सेंटर “बिगनिंग” पर आयोजित “फेस्टिवल फॉर ऑल” होली उत्सव सामाजिक समावेशन का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों के साथ मनाया गया यह पर्व केवल रंगों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि समानता और संवेदनशीलता का संदेश था।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए मनपसंद रंगों की पिचकारियाँ तैयार कीं। इसके पश्चात नृत्य-संगीत, रंग-गुलाल और पारंपरिक व्यंजनों के साथ पूरे वातावरण में उत्साह का रंग घुल गया।
🎤 साधना सिंन्हा का विशेष उद्बोधन
फाउंडर प्रेसिडेंट साधना सिंन्हा ने अपने संबोधन में कहा:
“होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक दूरी मिटाने का माध्यम है। जब तक समाज का अंतिम बच्चा भी इस खुशी में सहभागी न बने, तब तक त्योहार अधूरा है।”
उन्होंने कहा कि नन्हक फाउंडेशन का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और भविष्य के प्रति आशा का संचार करना है।
“इन बच्चों के जीवन में रंग केवल आज के गुलाल से नहीं, बल्कि शिक्षा और अवसरों से स्थायी रूप से भरने हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने समाज के सक्षम वर्ग से अपील की कि वे ऐसे प्रयासों में सहभागी बनें और त्योहारों को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ें।
🍬 उत्सव में अपनत्व की मिठास
गरम समोसे, नमकीन, लड्डू और गुजिया के वितरण के दौरान साधना सिंह स्वयं बच्चों के बीच रहीं। उन्होंने कहा कि त्योहारों की वास्तविक मिठास साझा करने में है।
कार्यक्रम में सत्य प्रकाश गर्ग, मनीष गुप्ता, श्रीमती पूनम, विदेशी, अतिथि ऐनी, लक्ष्मी वंदना, भावना सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे और सभी ने बच्चों के साथ मिलकर उत्सव की खुशियाँ साझा कीं।
🔭 नन्हक फाउंडेशन का विजन : एक विश्लेषण
नन्हक फाउंडेशन की यह पहल केवल एक दिवस का सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सामाजिक दृष्टि (Vision) का हिस्सा है। संस्था का विजन तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित दिखाई देता है:
1️⃣ समावेशी उत्सव संस्कृति
त्योहारों को केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रखकर समाज के वंचित वर्ग तक पहुँचाना—ताकि सामाजिक दूरी कम हो और समान भागीदारी की भावना विकसित हो।
2️⃣ शिक्षा के माध्यम से स्थायी सशक्तिकरण
बच्चों को केवल अस्थायी खुशी नहीं, बल्कि शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और मार्गदर्शन के माध्यम से भविष्य निर्माण का अवसर देना। पिचकारी निर्माण जैसी गतिविधियाँ बच्चों की कल्पनाशक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ावा देती हैं।
3️⃣ सामाजिक जिम्मेदारी का विस्तार
फाउंडेशन का प्रयास यह संकेत देता है कि सामाजिक परिवर्तन केवल सरकार या संस्थाओं का दायित्व नहीं, बल्कि हर नागरिक की सहभागिता से संभव है। त्योहारों के माध्यम से समाज को जोड़ना इस दिशा में प्रभावी कदम है।
इस आयोजन ने स्पष्ट किया कि नन्हक फाउंडेशन का विजन केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के हाशिये पर खड़े बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना है।
“फेस्टिवल फॉर ऑल” वास्तव में एक व्यापक सामाजिक सोच का प्रतीक बनकर उभरा — जहाँ रंग केवल चेहरे पर नहीं, बल्कि जीवन की दिशा में भरे जा रहे हैं।