BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts


 

64वें वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ, वेद प्रचार व समाज सुधार पर दिया गया जोर



  Vision Live / ग्रेटर नोएडा
 आर्य समाज मन्दिर, सूरजपुर में आज 64वें वार्षिक सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे चतुर्वेद मंत्रोच्चार एवं यज्ञ के साथ हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक एवं वैदिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
यज्ञ के ब्रह्मा के रूप में कृष्ण  एवं उनकी धर्मपत्नी सुरेशी  ने आहुति दी, जबकि मुख्य यजमान के रूप में पंडित धर्मवीर आर्य एवं लीना आर्या उपस्थित रहे। इसके उपरांत प्रस्तुत भजनों ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम में आर्य प्रतिनिधि सभा, लखनऊ के अध्यक्ष आचार्य सुदेश का ओजपूर्ण स्वागत फूल-मालाओं एवं पटका पहनाकर किया गया। अपने उद्बोधन में आचार्य सुदेश ने महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए उनके मिशन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल नारे लगाने से समाज में परिवर्तन नहीं आता, बल्कि इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्य करना आवश्यक है।
उन्होंने वेदों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेद विश्व की प्राचीनतम ज्ञान-संपदा हैं, जिनमें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र—विज्ञान, समाज और संस्कृति—का गूढ़ ज्ञान समाहित है। उन्होंने आर्य समाज के कार्यकर्ताओं से वेदों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
स्वामी सच्चिदानंद जी ने भी अपने विचार रखते हुए आर्य समाज की भूमिका और वेदों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। भजनोपदेशिका अमृता जी ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं सौरभ  ने भी अपनी प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर पंडित शिवदत्त आर्य, कमल सिंह आर्य, सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष मूलचंद शर्मा ने की। साथ ही हेमंत आर्य, भूदेव शर्मा, जगत सिंह आर्य, अनिल शर्मा, सुभाष आर्य एवं रामजस आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य बंधु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया और आगामी सत्रों में अधिकाधिक लोगों की सहभागिता का आह्वान किया।