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उमंग 2083: बच्चों की प्रतिभा, संस्कृति की झलक और नववर्ष की चेतना—दूसरे दिन ग्रेटर नोएडा बना उत्सवधर्मी मंच

    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
भारतीय पर्व आयोजन समिति द्वारा आयोजित “उमंग 2083” मेले के द्वितीय दिवस ने यह साबित कर दिया कि जब परंपरा और प्रतिभा एक साथ मंच पर आती हैं, तो वह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले लेती है। सेक्टर स्वर्ण नगरी स्थित श्री महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित इस दिनभर के आयोजन में बच्चों की रचनात्मकता, अभिभावकों का उत्साह और संस्कृति के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।
🎨 प्रतिभाओं का उत्सव: रंग, रचना और राग का संगम
दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण विभिन्न प्रतियोगिताएं रहीं, जिनमें चित्रकला, मेहंदी, “मिले सुर मेरा तुम्हारा” (एकल व समूह) जैसी गतिविधियों ने बच्चों को अपनी कला और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया।
करीब 200 से अधिक बच्चों ने इन प्रतियोगिताओं में भाग लेकर न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि भारतीय परंपराओं, प्रकृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक संदेशों को भी अपनी रचनाओं में उकेरा।
चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने भारतीय नववर्ष, प्रकृति संरक्षण, सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक भारत जैसे विषयों पर रंगों के माध्यम से सशक्त संदेश प्रस्तुत किए। वहीं मेहंदी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पारंपरिक डिजाइनों के साथ आधुनिक कलात्मकता का सुंदर मिश्रण दिखाया।
“मिले सुर मेरा तुम्हारा” प्रतियोगिता में बच्चों की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया, जहां एकल और समूह प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
🏆 निर्णायकों की पैनी नजर, प्रतिभाओं का सम्मान
सभी प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन अनुभवी निर्णायक मंडल द्वारा किया गया, जिन्होंने बच्चों की रचनात्मकता, प्रस्तुति, विषय की समझ और अभिव्यक्ति के आधार पर विजेताओं का चयन किया। आयोजकों ने बताया कि प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित कर उनके उत्साह को और बढ़ाया जाएगा।
💃 सांस्कृतिक संध्या: ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत झांकी
प्रतियोगिताओं के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे आयोजन को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया। चंद्रा म्यूजिक के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मणिपुरी नृत्य सहित विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भारत की विविधता को मंच पर सजीव कर दिया।
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, लोकधुनों की मधुरता और कलाकारों की सजीव अभिव्यक्ति ने दर्शकों को तालियों की गूंज में बांधे रखा।
यह सांस्कृतिक संध्या केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी दे रही थी कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और एकता में निहित है।
🪔 संस्कार और चेतना: नववर्ष का संदेश
इस अवसर पर विभाग प्रचारक चिरंजीव जी ने भारतीय संस्कृति और हिंदू नववर्ष के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि नव संकल्प, नव ऊर्जा और नव निर्माण का प्रतीक है।
उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को भारतीय संस्कारों से जोड़ें और ऐसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
🎤 आयोजकों की सोच: संस्कृति के माध्यम से समाज निर्माण
समिति के अध्यक्ष प्रणीत भाटी ने बताया कि “उमंग 2083” का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, संस्कृति और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम संयोजक सौरभ बंसल ने कहा कि बच्चों को मंच देना ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि यही बच्चे भविष्य में समाज और देश की दिशा तय करेंगे।
👥 गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई आयोजन की शोभा
कार्यक्रम की अध्यक्षता गौरव कसाना ने की। इस अवसर पर विवेक कुमार, संगीता सक्सेना, गुंजन, प्रेरणा, मीनाक्षी, रीना गुप्ता, आरती शर्मा, दुर्गेश्वरी सिंह, बीना अरोरा, गुड्डी तोमर, ज्योति सिंह, मुकुल गोयल, रवि जिंदल, विवेक अरोरा, आनंद, राजेन्द्र सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमामयी बना दिया।
🌟 विशेष एंगल: परंपरा से जुड़ती नई पीढ़ी
“उमंग 2083” का दूसरा दिन केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह एक सकारात्मक संकेत है कि आज की नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए तैयार है—बस उन्हें सही मंच और दिशा देने की आवश्यकता है।
यह आयोजन दिखाता है कि संस्कृति को जीवित रखने के लिए बड़े मंचों की नहीं, बल्कि सच्चे प्रयासों और सामूहिक सहभागिता की जरूरत होती है।
निष्कर्षतः, “उमंग 2083” का द्वितीय दिवस बच्चों की प्रतिभा, भारतीय संस्कृति की समृद्धता और सामाजिक एकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने यह संदेश दिया कि भविष्य सुरक्षित है—क्योंकि उसकी नींव संस्कारों पर रखी जा रही है।