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भारतीय नववर्ष के स्वागत में ग्रेटर नोएडा में सजेगा ‘उमंग 2083’ का सांस्कृतिक मेला


 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
भारतीय संस्कृति, परंपरा और नववर्ष के उल्लास को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा में इस वर्ष भी भारतीय नववर्ष स्वागत उत्सव “उमंग 2083” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। गत लगभग दो दशकों से लगातार आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम ने शहर की सांस्कृतिक पहचान का रूप ले लिया है।
भारत नवनिर्माण ट्रस्ट के अंतर्गत भारतीय पर्व आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित यह चार दिवसीय उत्सव 19 मार्च से 22 मार्च 2026 तक सम्राट मिहिर भोज सिटी पार्क, ग्रेटर नोएडा में आयोजित होगा। इस दौरान शहर में भारतीय संस्कृति, कला, संगीत और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम की तैयारियों और रूपरेखा की जानकारी साझा करने के लिए ग्रेटर नोएडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस उत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय नववर्ष की परंपरा, उसकी वैज्ञानिकता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रणीत भाटी ने बताया कि हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है, जो नवरात्र के प्रथम दिन के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग के अनुसार यह नववर्ष पूर्णतः वैज्ञानिक, शास्त्रसम्मत और प्रकृति के अनुकूल है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। वहीं ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो लगभग 57 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में विक्रम संवत कैलेंडर की स्थापना की थी। तभी से यह कैलेंडर हिंदू समाज में त्योहारों, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक आयोजनों की गणना का प्रमुख आधार बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में नई पीढ़ी को भारतीय नववर्ष के महत्व से जोड़ने के लिए ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है।
प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला
समिति के संयोजक सौरभ बंसल ने बताया कि 19 मार्च को वैदिक हवन और पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा। पहले दिन रंगोली प्रतियोगिता, “मिले सुर मेरा तुम्हारा” एकल गायन तथा “पंच परिवर्तन” विषय पर प्रोजेक्ट/पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं भाग लेंगे।
20 मार्च को चित्रकला प्रतियोगिता, मेहंदी प्रतियोगिता तथा “मिले सुर मेरा तुम्हारा” समूह गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस दिन चंद्रा म्यूजिक द्वारा एक भव्य सांस्कृतिक संध्या भी प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें संगीत और नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी।
21 मार्च को “इंद्रधनुष” सांस्कृतिक कार्यक्रम और एकल नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसी दिन शारदिया सांस्कृतिक समिति द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही प्रसिद्ध गायक कुलदीप आर्य द्वारा देशभक्ति गीतों और भजन संध्या की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होगी।
वैचारिक और सांस्कृतिक संवाद भी होंगे
मीडिया प्रभारी मुकुल गोयल ने बताया कि उत्सव में केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम ही नहीं बल्कि वैचारिक संवाद भी आयोजित किए जाएंगे। 20 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक चिरंजीव जी और 21 मार्च को सह प्रांत प्रचारक आनंद जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे और भारतीय संस्कृति, समाज और नववर्ष के महत्व पर अपने विचार रखेंगे।
लोक और शास्त्रीय कला की भी झलक
डॉ. आरती शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के अंतिम दिन 22 मार्च को नटना तीर्था टेम्पल ऑफ आर्ट (अय्यप्पा सेवा समिति) और उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति, ग्रेटर नोएडा द्वारा विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इन प्रस्तुतियों में लोकनृत्य, शास्त्रीय नृत्य और पारंपरिक संगीत के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री होंगे मुख्य अतिथि
सह संयोजक प्रो. विवेक कुमार ने बताया कि इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) अजय टम्टा शामिल होंगे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।
प्रेस वार्ता में रहे अनेक सामाजिक कार्यकर्ता
प्रेस वार्ता के दौरान कुलदीप शर्मा, विवेक अरोरा, चरणजीत नागर, मुकेश शर्मा, गुड्डी तोमर, बीना अरोरा, संगीता सक्सैना, मीनाक्षी माहेश्वरी, देवीशरण शर्मा, राजेश बिहारी, शिव ओम शर्मा, ललित शर्मा, महेंद्र उपाध्याय, दुर्गेश्वरी सिंह, राजेंद्र सोनी, किसलय, भोला, अरविंद साहू, डॉ. आरती शर्मा, रविनाथ, ज्योति सिंह, नेहा, ब्रजमोहन, अनिल तायल और दीपा कुमारी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आयोजकों का कहना है कि “उमंग 2083” केवल एक सांस्कृतिक मेला नहीं बल्कि भारतीय नववर्ष की परंपरा को समाज में पुनः स्थापित करने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक प्रयास है।