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सियासी समीकरण 2027: जेवर में ‘डाढा कार्ड’ से भाजपा का बड़ा दांव ?

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
विशेष रिपोर्ट | गौतमबुद्धनगर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर गौतमबुद्धनगर की जेवर सीट पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा के एक बयान ने जिले की सियासत में नए संकेत दे दिए हैं। उन्होंने इशारों में स्पष्ट कर दिया कि यदि इस बार जेवर विधानसभा से एडवोकेट नरेंद्र डाढा को भाजपा का टिकट मिल जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
यह बयान यूं ही नहीं आया, बल्कि इसे 2027 की चुनावी रणनीति के शुरुआती संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बदलते समीकरण और ‘डाढा कार्ड’
एडवोकेट नरेंद्र डाढा वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर जेवर से चुनाव मैदान में उतरे थे। चुनाव के बाद उनका बसपा से मोहभंग हुआ और उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। वे गौतमबुद्धनगर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र डाढा के छोटे भाई हैं और क्षेत्र में प्रभावशाली सामाजिक आधार रखते हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा में उनकी एंट्री के पीछे डॉ. महेश शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्हें सांसद का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है और यह भी कहा जाता है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से उनके अच्छे संबंध हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच से उनके नाम का संकेत देना एक रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।
एक तीर से दो निशाने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. महेश शर्मा का यह बयान बहुआयामी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
पहला, जेवर विधानसभा क्षेत्र में समय-समय पर उन्हें अपने ही खेमे से चुनौती मिलती रही है। यदि उनका समर्थक चेहरा प्रत्याशी बनता है तो स्थानीय स्तर पर विरोधी गुट स्वतः कमजोर हो सकते हैं।
दूसरा, जेवर और आसपास के क्षेत्र में गुर्जर समाज की निर्णायक भूमिका है। डाढा परिवार की सामाजिक पकड़ भाजपा को इस वर्ग में मजबूत आधार दे सकती है। ऐसे में “डाढा कार्ड” सामाजिक समीकरण साधने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
भाजपा की दो शक्ति धुरी
गौतमबुद्धनगर की राजनीति में भाजपा के दो प्रमुख शक्ति केंद्र माने जाते हैं—
डॉ. महेश शर्मा (सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री)
राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर
जिले की चुनावी तैयारियों पर नजर डालें तो संगठनात्मक पकड़ के मामले में डॉ. महेश शर्मा का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। ऐसे में जेवर सीट को लेकर उनका संकेत संगठन की दिशा तय करने वाला भी माना जा रहा है।
होली मिलन से सियासी संदेश
यह बयान ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के ग्राम डाढा में आयोजित होली मिलन समारोह के दौरान आया। यह आयोजन स्वयं एडवोकेट नरेंद्र डाढा द्वारा उनके फार्म हाउस पर किया गया था और प्रतिवर्ष आयोजित होता रहा है।
कार्यक्रम में डॉ. महेश शर्मा के अलावा भाजपा जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा, जिला पंचायत सदस्य देवा भाटी, जिला उपाध्यक्ष राहुल पंडित, ग्रेटर नोएडा मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी सहित कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन और संभावित दावेदारी का सार्वजनिक संकेत भी था।
हाई-प्रोफाइल सीट पर हाई-लेवल रणनीति
जेवर विधानसभा क्षेत्र नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास के कारण प्रदेश की हाई-प्रोफाइल सीटों में गिना जाता है। यहां प्रत्याशी चयन केवल स्थानीय समीकरणों का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश स्तरीय रणनीति का हिस्सा भी होता है।
यदि भाजपा नरेंद्र डाढा पर दांव लगाती है, तो यह सामाजिक संतुलन, संगठनात्मक निष्ठा और स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश होगा। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के हाथ में रहेगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि जेवर में 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है।
🔎 विजन लाइव का विश्लेषण:
विजन लाइव के विश्लेषण के अनुसार, डॉ. महेश शर्मा का यह बयान सामान्य राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक संकेत है। यह कदम संगठन के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने, संभावित आंतरिक विरोध को संतुलित करने और गुर्जर समाज को स्पष्ट संदेश देने की दिशा में देखा जा सकता है।
एडवोकेट नरेंद्र डाढा का नाम सार्वजनिक रूप से उछालना एक तरह से “टेस्टिंग बैलून” भी हो सकता है, जिसके माध्यम से संगठन और समाज की प्रतिक्रिया को परखा जा रहा है। यदि माहौल अनुकूल बनता है तो दावेदारी मजबूत होगी, और यदि समीकरण बदलते हैं तो विकल्प खुले रहेंगे।
फिलहाल इतना तय है कि 2027 की सियासी पटकथा लिखी जानी शुरू हो चुकी है—और जेवर विधानसभा उस पटकथा का एक निर्णायक अध्याय बनने की ओर बढ़ रही है।