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स्पेशल न्यूज़ स्टोरी:--ऐच्छर में 14 मार्च को गूंजेगी क्रांतिकारी किसान नेता विजय सिंह पथिक की गाथा, जयंती पर संगोष्ठी व सम्मान समारोह की व्यापक तैयारियां

 मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा 
भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अनेक महान वीरों के साहस, त्याग और संघर्ष की अमर गाथाओं से भरा हुआ है। इन महान क्रांतिकारियों में क्रांतिकारी किसान नेता, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और प्रखर चिंतक विजय सिंह पथिक का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने न केवल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की, बल्कि किसानों और शोषित वर्ग को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा भी दी।
इन्हीं महान क्रांतिकारी के आदर्शों और विचारों को समाज तक पहुंचाने तथा नई पीढ़ी को उनके संघर्ष से परिचित कराने के उद्देश्य से अखिल भारतीय गुर्जर महासभा द्वारा 14 मार्च को ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर स्थित रामलीला मैदान में विजय सिंह पथिक जयंती के अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर समाज के लोगों में उत्साह देखा जा रहा है और तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं।
प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर दी गई कार्यक्रम की जानकारी
इस कार्यक्रम को लेकर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के पदाधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा के स्वर्ण नगरी स्थित ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर विस्तृत जानकारी साझा की। पत्रकार वार्ता में महासभा के नेताओं ने बताया कि विजय सिंह पथिक केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले अग्रदूत और समाज को दिशा देने वाले महान चिंतक भी थे।
पदाधिकारियों ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के उन नायकों के बारे में जानने की जरूरत है, जिन्होंने अपने जीवन को देश और समाज के लिए समर्पित कर दिया। इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, ताकि समाज के लोग उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा ले सकें।
किसान आंदोलन के इतिहास में अमिट है पथिक का योगदान
विजय सिंह पथिक का जन्म 27 फरवरी 1882 को हुआ था और उनका मूल नाम भूप सिंह था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की भावना प्रबल थी। उस दौर में भारत अंग्रेजी शासन की गुलामी में जकड़ा हुआ था और किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में किसानों पर अत्यधिक कर, बेगार और अन्य शोषणकारी व्यवस्थाएं लागू थीं। किसानों से जबरन कर वसूला जाता था और उन्हें बिना मजदूरी के काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। इन परिस्थितियों में किसानों का जीवन अत्यंत कठिन हो गया था।
ऐसे समय में विजय सिंह पथिक ने किसानों को संगठित कर बिजौलिया किसान आंदोलन को नई दिशा दी। यह आंदोलन उस समय के सबसे बड़े किसान आंदोलनों में से एक था। उनके नेतृत्व में किसानों ने संगठित होकर अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष किया।
बिजौलिया आंदोलन ने पूरे देश में किसानों के अधिकारों के सवाल को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया और यह आंदोलन भारतीय किसान आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
संगठन और शिक्षा को मानते थे सबसे बड़ी शक्ति
विजय सिंह पथिक का मानना था कि जब तक समाज शिक्षित और संगठित नहीं होगा, तब तक वास्तविक स्वतंत्रता संभव नहीं है। यही कारण था कि उन्होंने किसानों को केवल आंदोलन के लिए प्रेरित नहीं किया बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी किया।
उन्होंने समाज में शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया और लोगों को सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी जागरूक किया। उनके विचारों में सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रीय एकता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।
लेखक और पत्रकार के रूप में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
विजय सिंह पथिक एक कुशल लेखक, पत्रकार और विचारक भी थे। उन्होंने अपने लेखों और पत्रकारीय लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया। उनके लेखों में किसानों की समस्याएं, सामाजिक न्याय और देशभक्ति की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती थी।
उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और अपने अधिकारों के लिए संगठित होने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि उन्हें भारतीय किसान आंदोलन के प्रमुख प्रेरणास्रोतों में गिना जाता है।
कार्यक्रम में कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति की संभावना
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रहने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से—
जयंत चौधरी – केंद्रीय राज्य मंत्री, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार
सुरेंद्र सिंह नागर – राज्यसभा सांसद
सोमेंद्र तोमर – ऊर्जा राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
अशोक कटारिया – विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
नरेंद्र भाटी – विधान परिषद सदस्य, उत्तर प्रदेश सरकार
तेजपाल नागर – विधायक, दादरी विधानसभा
इन सभी जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ेगी तथा समाज और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
समाज और युवाओं को जोड़ेगा यह आयोजन
संगोष्ठी के दौरान समाज के वरिष्ठजन, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता विजय सिंह पथिक के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों को साझा करेंगे। इसके साथ ही युवाओं को उनके आदर्शों को अपनाने और समाज सेवा में आगे आने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कार्यक्रम में शिक्षा के प्रसार, युवाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक एकता और समाज के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। आयोजकों का मानना है कि समाज की उन्नति तभी संभव है जब सभी लोग मिलकर सामूहिक रूप से प्रयास करें।
समाज के लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के पदाधिकारियों ने समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे 14 मार्च को ऐच्छर के रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर महान क्रांतिकारी विजय सिंह पथिक को श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
पत्रकार वार्ता में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. यशवीर सिंह (संरक्षक), हरिश्चंद्र भाटी (राष्ट्रीय अध्यक्ष), जयप्रकाश विकल (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), केपी कसाना (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), सविंदर भाटी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), रामकेश चपराना (राष्ट्रीय महासचिव), अशोक भाटी (जिला अध्यक्ष गौतमबुद्ध नगर), मनवीर नागर, नमित भाटी (राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर युवा), सत्य प्रकाश विकल, दीपक भाटी, अजय गुर्जर और अरुण भाटी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
पथिक का जीवन आज भी देता है प्रेरणा
विजय सिंह पथिक का जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बल्कि आज भी समाज को प्रेरित करने वाली एक जीवंत विरासत है। उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि यदि समाज संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए खड़ा हो जाए तो अन्याय के खिलाफ बड़ी से बड़ी ताकत को भी झुकना पड़ता है।
ऐच्छर के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम केवल एक जयंती समारोह नहीं बल्कि इतिहास को याद करने, समाज को जागरूक करने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।