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नगाड़ों की गूंज, फाग की तान और आस्था का सैलाब: बाबा मोहन राम मंदिर पर सदियों पुरानी होली परंपरा

 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा (बिरौंडा गांव)

ग्रेटर नोएडा के तेजी से शहरीकरण के बीच बसे बिरौंडा गांव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आधुनिकता की दौड़ में भी परंपरा और लोकसंस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं। होली के पावन पर्व पर ग्यारस (एकादशी) के दिन सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा के तहत बाबा मोहन राम मंदिर परिसर में भव्य आयोजन हुआ, जिसमें आसपास के तमाम गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
ग्यारस की सुबह से शुरू होता है उत्सव
ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। ग्यारस के दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। सबसे पहले बाबा मोहन राम की विधिवत पूजा-अर्चना होती है, उसके बाद फाग गीतों की स्वर लहरियां वातावरण में गूंजने लगती हैं।
ढोल, बमब और नगाड़ों की थाप पर ग्रामीण पारंपरिक अंदाज में होली गाते और नृत्य करते हैं। यह दृश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव का जीवंत रूप होता है।
तालाब और परंपराओं का धार्मिक महत्व
मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन तालाब इस आयोजन का विशेष केंद्र है। यहां बच्चों का ‘लटूरी मुंडन’ संस्कार कराया जाता है। नवविवाहित जोड़े ‘गठजोड़े की जात’ चढ़ाने आते हैं, जो उनकी नई जीवन यात्रा के मंगलमय होने की कामना का प्रतीक है।
ग्रामीण मान्यता है कि बाबा मोहन राम के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। यही कारण है कि दूर-दराज के गांवों से भी महिला-पुरुष अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
फाग गायन से सजा सांस्कृतिक मंच
होली के रंगारंग कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रसिद्ध लोकगायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। गायक नीरज भाटी, रामकुमार पंडित (घरबरा), महाशय रवि नागर (ऐच्छर), महाशय सुभाष तथा महाशय गौरव भाटी (डाबरा-बिरौंडा) ने पारंपरिक फाग और होली गीतों से वातावरण को ब्रज संस्कृति के रंग में रंग दिया।
गीतों में जहां राधा-कृष्ण की होली की झलक दिखी, वहीं ग्रामीण जीवन की सादगी और उत्साह भी झलका। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी ने एक साथ थिरककर सामाजिक एकता का संदेश दिया।
सामूहिक प्रयास से साकार होता है आयोजन
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में गांव के अनेक गणमान्य लोगों की अहम भूमिका रही। धर्मवीर नंबरदार, चेनपाल प्रधान, राकेश नंबरदार, कंवर सिंह भाटी, रवि भाटी, प्रमोद मुखिया, अशोक नंबरदार, मेहरचंद प्रधान (सफीपुर), भगवत भाटी, चतर सिंह भाटी, जयप्रकाश, महावीर, संतराम धामा, विजयपाल भाटी, उदयवीर ठेकेदार, मेहरचंद और जोगिंदर सहित कई ग्रामीणों ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली।
सुरक्षा, प्रसाद वितरण, मंच व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे गांव ने मिलकर कार्य किया। यही सामूहिक भावना इस परंपरा को जीवित रखे हुए है।
विशेष एंगल: “शहरीकरण के बीच लोकसंस्कृति की जीवित पहचान
ग्रेटर नोएडा आज औद्योगिक और शहरी विकास का प्रतीक बन चुका है, लेकिन बिरौंडा गांव का यह आयोजन दिखाता है कि ग्रामीण समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से अब भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
बाबा मोहन राम मंदिर पर गूंजते फाग गीत केवल होली का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, पारिवारिक एकजुटता और लोक परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक हैं। यहां धर्म, संस्कृति और सामाजिक जीवन एक-दूसरे से जुड़े हुए नजर आते हैं।
यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़ने, सामूहिकता की भावना मजबूत करने और ग्रामीण पहचान को सहेजने का सशक्त माध्यम बन चुका है। बिरौंडा की यह होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि विरासत और विश्वास की होली