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डिजिटल भारत की साइबर ढाल बना शारदा विश्वविद्यालय, RDCS-2025 ने दिया वैश्विक संदेश


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
जब पूरी दुनिया डिजिटल युग में तेजी से आगे बढ़ रही है, ऐसे समय में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक विश्वास का मूल आधार बन चुकी है। इसी संदर्भ में शारदा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्प्रिंगर तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन – “साइबर सुरक्षा में हालिया विकास (RDCS-2025)” ने भारत को वैश्विक साइबर विमर्श के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया।
यह सम्मेलन केवल शोध पत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भविष्य की साइबर रणनीतियों, नीति निर्माण और इंडस्ट्री-अकादमिक साझेदारी का सशक्त मंच बनकर उभरा। देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर हमले, डेटा चोरी और डिजिटल पहचान की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होंगी।
अकादमिक ज्ञान और इंडस्ट्री अनुभव का संगम
सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता रही अकादमिक और उद्योग जगत का सीधा संवाद
सेलपॉइंट टेक्नोलॉजीज़ के सॉल्यूशंस कंसल्टेंट लीडर अभिषेक पांडे ने कहा कि
“आज साइबर सुरक्षा भरोसे की नींव है। यदि डिजिटल पहचान सुरक्षित नहीं है, तो कोई भी डिजिटल व्यवस्था टिकाऊ नहीं हो सकती।”
उनका यह वक्तव्य संकेत देता है कि भविष्य में साइबर आइडेंटिटी सिक्योरिटी वैश्विक एजेंडे का अहम हिस्सा बनने जा रही है।
शारदा विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान मजबूत
सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी एंड क्रिप्टोलॉजी के प्रमुख प्रो. श्री कांत ने सम्मेलन को
“अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग का जीवंत उदाहरण” बताया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि साइबर समाधान प्रदाता राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में मदद करते हैं।
युवा शोधकर्ताओं के लिए भविष्य का द्वार
RDCS-2025 ने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को यह संदेश दिया कि
साइबर सुरक्षा अब केवल नौकरी का क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी है।
ब्लॉकचेन, IoT सुरक्षा, क्लाउड सिक्योरिटी और साइबर फॉरेंसिक जैसे विषयों पर हुई चर्चाओं ने युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की दिशा दिखाई।
ग्रेटर नोएडा से वैश्विक साइबर संवाद
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अमृता द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डॉ. रवि, डॉ. प्रशांत, डॉ. केशव, डॉ. साहीन नाज सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविदों की उपस्थिति ने सम्मेलन को और भी प्रभावशाली बनाया।
"विजन लाइव" का विश्लेषण
स्प्रिंगर तृतीय अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सम्मेलन RDCS-2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि
शारदा विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि डिजिटल भविष्य की सुरक्षा गढ़ने वाला संस्थान बनकर उभर रहा है।
यह आयोजन न केवल विश्वविद्यालय बल्कि ग्रेटर नोएडा और भारत की वैश्विक साइबर पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक ले गया।