BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts


 

GIMS में AI का नया अध्याय: सरकारी अस्पताल में भारत के पहले AI क्लिनिक का ऑन-ग्राउंड समापन, डॉक्टर–स्टार्टअप साझेदारी को मिली नई दिशा

    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
सरकारी अस्पतालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने अपने सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI GIMS) के माध्यम से AI स्टार्टअप टाउनहॉल एवं AI मेडटेक डॉक्टर–स्टार्टअप राउंडटेबल का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम सरकारी अस्पताल में भारत के पहले AI क्लिनिक के फिजिकल ऑन-ग्राउंड चरण का औपचारिक समापन था।
इस टाउनहॉल ने नीति-निर्माताओं, देश–विदेश के शीर्ष चिकित्सकों, AI विशेषज्ञों और मेडटेक स्टार्टअप्स को एक साझा मंच पर लाकर यह संदेश दिया कि भविष्य की स्वास्थ्य सेवाएँ अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे मरीजों के बीच आकार ले रही हैं।
देश–विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की सहभागिता
कार्यक्रम में AIIMS दिल्ली, AIIMS देवघर, IIT कानपुर (मेडटेक एवं AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस), NASSCOM, NHS लंदन (यूके) तथा अमेरिका (USA) के विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही। राष्ट्रीय ऑनलाइन उद्घाटन के बाद यह टाउनहॉल AI क्लिनिक के वास्तविक क्रियान्वयन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुआ।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट नेतृत्व की मौजूदगी
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सुजाता चौधरी, एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (Addl. DGHS), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार रहीं। उन्होंने GIMS परिसर में AI क्लिनिक के फिजिकल रोल-आउट के अंतर्गत डॉक्टर–स्टार्टअप राउंडटेबल का उद्घाटन किया।
विशिष्ट अतिथियों में
प्रो. (डॉ.) नितिन एम. गंगाने, निदेशक एवं सीईओ, AIIMS देवघर (गेस्ट ऑफ ऑनर)
डॉ. अभिषेक शंकर, प्रख्यात ऑन्कोलॉजिस्ट, AIIMS दिल्ली (कीनोट स्पीकर)
ब्रिगेडियर (डॉ.) राकेश कुमार गुप्ता, निदेशक, GIMS ग्रेटर नोएडा
शामिल रहे।
IIT कानपुर के डॉ. सर्वेश सोनकर, हेड, मेडटेक एवं AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ने वर्चुअल रूप से जुड़ते हुए कहा कि AI स्टार्टअप्स की सफलता के लिए अस्पताल-आधारित वैलिडेशन और चिकित्सकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सबसे अहम कड़ी है।
वैश्विक अनुभव, भारतीय जरूरतें
अमेरिका से डॉ. नंदिनी टंडन, को-फाउंडर एवं बोर्ड मेंबर, IndUS SETU Global Foundation ने AI आधारित हेल्थकेयर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्रॉस-बॉर्डर इनोवेशन और स्टार्टअप–हॉस्पिटल इंटीग्रेशन पर अपने विचार साझा किए।
इसके साथ ही NHS लंदन (यूके), NASSCOM सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, पेशेंट सेफ्टी सेक्रेटेरिएट (भारत सरकार) और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर मेडिकल डिवाइसेज से जुड़े विशेषज्ञों ने चर्चाओं को समृद्ध किया।
AI स्टार्टअप टाउनहॉल के ठोस निष्कर्ष
यह टाउनहॉल केवल संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे हॉस्पिटल-इंटीग्रेटेड इनोवेशन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया। प्रमुख निष्कर्ष रहे:
कैंसर, टीबी, गैर-संचारी रोग (NCDs) और ट्रॉमा में AI आधारित उच्च-प्रभावी उपयोग मामलों की पहचान
स्टार्टअप्स को डॉक्टरों से प्रत्यक्ष क्लिनिकल फीडबैक और वैलिडेशन पाथवे
सरकारी अस्पतालों में AI समाधान के डिप्लॉयमेंट, वर्कफ्लो इंटीग्रेशन और नीति-संगतता पर गंभीर मंथन
डॉक्टर–स्टार्टअप सहयोग मॉडल को संस्थागत मजबूती
चयनित स्टार्टअप्स ने अपने समाधान प्रस्तुत किए, जिन्हें चिकित्सकों और नीति विशेषज्ञों से सीधा मार्गदर्शन मिला, जिससे नवाचारों को मरीजों तक पहुँचाने की प्रक्रिया तेज होगी।
नेतृत्व की आवाज़
डॉ. राहुल सिंह, सीईओ, CMI GIMS ने कहा,
“यह टाउनहॉल साबित करता है कि सरकारी अस्पताल भी राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थकेयर इनोवेशन के केंद्र बन सकते हैं। जब स्टार्टअप्स वास्तविक क्लिनिकल वातावरण में काम करते हैं, तभी AI समाधान व्यावहारिक, स्केलेबल और मरीज-केंद्रित बनते हैं।”
ब्रिगेडियर (डॉ.) राकेश कुमार गुप्ता, निदेशक, GIMS ने कहा,
“उत्तर प्रदेश सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व में GIMS जैसे संस्थान AI और मेडटेक इनोवेशन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इससे रोगी सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और समान स्वास्थ्य सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।”
डॉ. सुजाता चौधरी, Addl. DGHS ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों को जिम्मेदार, साक्ष्य-आधारित और नैतिक AI अपनाने में नेतृत्व करना चाहिए, ताकि शुरुआती निदान और बेहतर इलाज हर नागरिक तक पहुँच सके।
एक नई दिशा
“Access to Doctors • Data • Validation • Deployment” की थीम के साथ आयोजित यह टाउनहॉल भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में AI के भविष्य के लिए एक मजबूत नींव बनकर उभरा है—जहाँ तकनीक, चिकित्सक और मरीज एक साझा उद्देश्य के लिए साथ खड़े