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जब शिक्षक बने सम्मान के केंद्र: आईईसी कॉलेज में शिक्षा के असली नायकों का महाकुंभ


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
नॉलेज पार्क स्थित आईईसी कॉलेज का परिसर रविवार को केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि शिक्षा, सम्मान और प्रेरणा का तीर्थ बन गया। एनसीआर क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी स्कूलों में कार्यरत उन शिक्षकों को एक मंच पर सम्मानित किया गया, जो वर्षों से बिना किसी दिखावे के समाज की नींव मजबूत कर रहे हैं। यह समारोह केवल पुरस्कार वितरण नहीं था, बल्कि उस मौन तपस्या का सार्वजनिक सम्मान था, जो शिक्षक रोज़ कक्षा में करते हैं।
गांव की पाठशाला से स्मार्ट क्लास तक – एक साथ दिखी शिक्षा की पूरी तस्वीर
इस समारोह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें दूरदराज के गांवों में पढ़ाने वाले शिक्षक और अत्याधुनिक शहरी स्कूलों के शिक्षक एक साथ मंच पर दिखाई दिए। किसी ने मिट्टी के फर्श वाली कक्षा में बच्चों को अक्षर ज्ञान कराया, तो किसी ने स्मार्ट बोर्ड से भविष्य की पीढ़ी को तकनीक से जोड़ा।
188 से अधिक प्रधानाचार्य और शिक्षकों का एक साथ सम्मान होना इस बात का प्रमाण था कि शिक्षा का संघर्ष हर जगह समान है – बस परिस्थितियाँ अलग हैं।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ ज्ञान का शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के सीएफओ अभिजीत कुमार, एक्सीक्यूटिव निदेशक प्रो. सुनील कुमार, निदेशक प्रो. विनय गुप्ता, डॉ. भानु प्रताप सिंह सागर एवं भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। दीप की लौ ने जैसे यह संदेश दिया कि ज्ञान की रोशनी तभी फैलती है, जब शिक्षक सम्मानित होते हैं।
शिक्षक ही राष्ट्र का असली निर्माता – वक्ताओं की एक आवाज
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एमएलसी चंद शर्मा ने कहा कि
“अगर कोई देश महान बनता है, तो उसकी शुरुआत कक्षा से होती है और उसका निर्माण शिक्षक करते हैं।”
संस्थान के एक्सीक्यूटिव निदेशक प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं, जिनके बिना राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। वहीं निदेशक प्रो. विनय गुप्ता ने शिक्षकों को बदलाव का वाहक बताते हुए कहा कि आज के शिक्षक केवल विषय नहीं पढ़ाते, बल्कि संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति भी सिखाते हैं।
सम्मान नहीं, कर्तव्य का निर्वहन – भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा
भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम समाज का शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज जब शिक्षक सम्मानित होते हैं, तो समाज अपने भविष्य को सम्मान देता है।
188 शिक्षकों का सम्मान: एक ऐतिहासिक क्षण
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक एवं एडमिशन हेड नुरुल हसन ने बताया कि इस समारोह में एनसीआर क्षेत्र के 188 से अधिक प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों को शाल ओढ़ाकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस आयोजन को हर वर्ष और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा।
छात्रों के लिए जीवंत प्रेरणा बना समारोह
इस आयोजन का सबसे भावनात्मक पहलू छात्रों की उपस्थिति रही। जब छात्रों ने अपने शिक्षकों को मंच पर सम्मानित होते देखा, तो उनकी आंखों में गर्व और प्रेरणा साफ झलक रही थी। यह दृश्य स्वयं में एक जीवंत पाठ था – कि सम्मान मेहनत और समर्पण से मिलता है।
आभार और संकल्प के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में डीन एकेडमिक्स प्रो. विभूति शरण ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, आयोजकों एवं छात्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आईईसी कॉलेज भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से शिक्षा और समाज के बीच सेतु बनाता रहेगा।