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चौधरी हाजी ननका सैफी की सोच हर ठंडी रात में गरीब के कंधों पर पड़े कंबल के रूप में जिंदा

स्पेशल स्टोरी | सेवा, संगठन और समाजवाद की विरासत
चौधरी हाजी ननका सैफी: जिनकी सोच आज भी ठंड में गरीबों को राहत बनकर पहुंच रही है
मौहम्मद इल्यास – “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा 
कुछ लोग अपने जीवनकाल में ही इतिहास बन जाते हैं और कुछ अपने बाद भी समाज को दिशा देते रहते हैं। गौतम बुद्ध नगर की धरती पर समाजसेवा, सामाजिक एकता और समाजवादी विचारधारा के मजबूत स्तंभ रहे चौधरी हाजी ननका सैफी ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिनकी सोच, संघर्ष और सेवा की विरासत आज भी जीवित है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित 500 कंबलों का वितरण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस विचारधारा की निरंतरता है, जिसे उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
एक नाम, जो सैफी बिरादरी की पहचान बना
चौधरी हाजी ननका सैफी ने गौतम बुद्ध नगर में ऑल इंडिया जमात-ए-सैफिया का झंडा बुलंद कर सैफी बिरादरी को संगठित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। उस दौर में जब समाज बिखराव की ओर बढ़ रहा था, उन्होंने संगठन, एकता और भाईचारे को मजबूती दी। बिरादरी के सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक हक की बात उन्होंने हमेशा बेबाकी से रखी।
समाजवाद सिर्फ विचार नहीं, जीवन शैली थी
राजनीतिक रूप से हाजी ननका सैफी, नेताजी मुलायम सिंह यादव की समाजवादी विचारधारा से गहराई से प्रभावित और जुड़े हुए थे। समाजवादी पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा में लंबे समय तक गौतम बुद्ध नगर के जिला अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया। अल्पसंख्यक समाज की समस्याएं हों या गरीबों की आवाज, वे हमेशा आगे खड़े नजर आए।
जब ठंड से लड़ता था उनका कंबल अभियान
हाजी ननका सैफी की पहचान सिर्फ संगठन या राजनीति तक सीमित नहीं रही। कड़कड़ाती ठंड में गरीब, बेसहारा और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों को कंबल, शॉल और गर्म कपड़े वितरित करना उनका नियमित सेवा कार्य था। कई बार हालात ऐसे बने कि जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी तक उनके कंबल वितरण कार्यक्रमों में स्वयं पहुंचे, जो उनकी नीयत और सेवा भावना पर मुहर लगाता है।
पुण्यतिथि पर जीवंत हुई वही सोच
सोमवार को सूरजपुर में आयोजित कंबल वितरण एवं सामूहिक भोज कार्यक्रम उसी सोच की जीवंत झलक था। 500 जरूरतमंदों को कंबल वितरण के साथ सैकड़ों लोगों को भोजन कराया गया। ठंड से कांपते लोगों के चेहरों पर राहत और आंखों में दुआएं साफ दिखाई दीं। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि सेवा कभी मरती नहीं, वह पीढ़ियों में आगे बढ़ती है।
परिवार ने थामी विरासत की मशाल
आज चौधरी हाजी ननका सैफी के परिवार के सदस्य उसी रास्ते पर चल रहे हैं, जिसे उन्होंने रोशन किया था। परिवार का कहना है कि यह केवल पुण्यतिथि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है—गरीबों के साथ खड़े रहने की।
समाज और सियासत की साझा मौजूदगी
कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी, सपा नेता विकास जतन प्रधान, राम शरण नागर, समसुद्दीन एडवोकेट सहित कई राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और गरिमा प्रदान की।
इसके अलावा नवाब ननका, हाजी इकबाल, इशाक पहलवान, कपिल ननका, सकील, साहिल सैफी, अज्जू सैफी, एजाज, असगर प्रधान, असगर सैफी, रियाज, इरशाद खान, धर्मपाल प्रधान, ओमवीर बैसला, विजयपाल भाटी, देवा पंडित सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
एक संदेश, जो समाज को जोड़ता है
यह स्पेशल स्टोरी केवल एक व्यक्ति की पुण्यतिथि नहीं, बल्कि उस सोच की कहानी है जिसमें
👉 सेवा राजनीति से ऊपर है,
👉 संगठन समाज की ताकत है,
👉 और गरीब की मदद ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
चौधरी हाजी ननका सैफी आज भले हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी सोच आज भी हर ठंडी रात में किसी गरीब के कंधों पर पड़े कंबल के रूप में जिंदा है।