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मनरेगा की ज़मीन से उठी आवाज़, नीमका गांव बना जनसंघर्ष का केंद्र

✨ “रोज़गार नहीं तो पलायन तय” — पंचायत बैठक में श्रमिकों की चेतावनी
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
गौतमबुद्धनगर | जेवर विधानसभा
मनरेगा सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गांव के गरीब, मजदूर और किसान के लिए रोज़गार, सम्मान और जीवन की गारंटी है। इसी भावना को ज़मीन पर मजबूत करने के उद्देश्य से जिला कांग्रेस गौतमबुद्ध नगर द्वारा चलाए जा रहे “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत जेवर विधानसभा क्षेत्र के नीमका गांव में पंचायत स्तरीय जागरूकता बैठक आयोजित की गई।
बैठक का माहौल सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम से अलग था। यहां मंच से भाषण कम और ग्रामीणों के दर्द, सवाल और चेतावनी ज़्यादा सुनाई दी। मजदूरों ने साफ शब्दों में कहा—
“अगर मनरेगा कमजोर हुआ तो गांव से शहर की मजबूरी और बढ़ेगी।”
🟥 ग्रामीणों की आवाज़: काम मांगने पर मिलता है इंतज़ार
बैठक में उपस्थित मनरेगा श्रमिकों ने भुगतान में देरी, काम की उपलब्धता में कमी और जॉब कार्ड से जुड़ी दिक्कतों को खुलकर रखा। कई मजदूरों ने बताया कि काम मांगने के बाद भी कई-कई हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे परिवार की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
पूर्व प्रधानाचार्य तेजपाल सिंह अत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह स्पष्ट संदेश उभरा कि मनरेगा को कमजोर करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने जैसा है।
🟦 कांग्रेस का सीधा आरोप: मनरेगा को खत्म करने की साजिश
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि—
मनरेगा कांग्रेस की ऐतिहासिक देन है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सुरक्षा दी। आज योजनाबद्ध तरीके से बजट कटौती, भुगतान में देरी और नियमों में बदलाव कर इसे कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने ऐलान किया कि पंचायत से लेकर जिले तक यह संघर्ष थमेगा नहीं।
🟨 “यह योजना नहीं, सम्मान की गारंटी है”
बैठक के संयोजक ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सूबेदार सतपाल सिंह ने कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए सिर्फ मजदूरी नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा बचाओ संग्राम को गांव-गांव जन आंदोलन में बदला जाएगा, ताकि सरकार को जनभावना का अहसास कराया जा सके।
🔴 राजनीतिक अभियान से आगे, सामाजिक आंदोलन की ओर कदम
कांग्रेस नेता दुष्यन्त नागर और जिला संगठन प्रभारी मुकेश शर्मा ने बताया कि यह अभियान अब सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर पंचायत में जागरूकता, संवाद और संघर्ष के जरिए इसे व्यापक जन आंदोलन बनाया जाएगा।
अगली बैठक दादरी विधानसभा के मोहियापुर गांव में आयोजित की जाएगी।
🟢 नीमका से उठी चेतावनी
नीमका गांव की यह बैठक एक साफ संदेश छोड़ गई—
अगर मनरेगा कमजोर हुई, तो गांव कमजोर होगा।
और गांव कमजोर हुआ, तो देश की नींव हिलेगी।
मनरेगा बचाओ संग्राम अब राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आवाज़ बनता जा रहा है।