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गलगोटिया विश्वविद्यालय में पाँच दिवसीय मेडिएशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य समापन



वैकल्पिक विवाद समाधान के क्षेत्र में शिक्षकों को मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ यीडा सिटी
ऑल इंडिया एसोसिएशन फॉर मेडिएशन एंड आर्बिट्रेशन सर्विसेज (आईमास) एवं स्कूल ऑफ लॉ, गलगोटिया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय मेडिएशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का 31 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक चला, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकों को वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) और प्रभावी संघर्ष प्रबंधन के व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाना रहा।
मेडिएशन संवाद और सौहार्द की सबसे प्रभावी प्रक्रिया”
कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य अतिथि चन्द्र प्रकाश गोयल, महानिदेशक (वन), भारत सरकार, ने मेडिएशन की सामाजिक और न्यायिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा—
“मेडिएशन केवल न्यायालयी प्रक्रिया का विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय, प्रभावी और समयबद्ध व्यवस्था है, जो संवाद को पुनः स्थापित करती है और समाज में सौहार्द को बढ़ावा देती है। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा दिया गया मध्यस्थता प्रशिक्षण भविष्य की न्याय प्रणाली को अधिक संवेदनशील और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है गलगोटिया विश्वविद्यालय
इस अवसर पर चांसलर सुनील गलगोटिया ने स्कूल ऑफ लॉ, गलगोटिया विश्वविद्यालय द्वारा गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में संचालित पारिवारिक विवाद मध्यस्थता केंद्र की सराहना की। उन्होंने बताया कि पारिवारिक विवादों में एफआईआर दर्ज होने से पूर्व मामलों को मध्यस्थता केंद्र में भेजा जाता है, जहाँ विश्वविद्यालय के प्रशिक्षित फैकल्टी सदस्य मध्यस्थता करते हैं। यह पहल विश्वविद्यालय की सामाजिक जिम्मेदारी और व्यवहारिक विधिक शिक्षा के प्रति उसके मजबूत दृष्टिकोण को दर्शाती है।
मेडिएशन भविष्य की न्याय व्यवस्था का मजबूत स्तंभ”
मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा—
“ऐसे कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षण को उद्योग और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ते हैं। मेडिएशन भविष्य की न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और गलगोटिया विश्वविद्यालय इस दिशा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाता रहेगा।”
30 प्रतिभागियों ने लिया बहु-विषयक प्रशिक्षण
इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विधि, मीडिया अध्ययन, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान और वाणिज्य संकायों से कुल 30 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान मध्यस्थता की अवधारणा, संवाद कौशल, नेगोशिएशन तकनीक, नैतिक पहलुओं और वास्तविक केस-आधारित अभ्यासों पर विशेष जोर दिया गया।
“मेडिएशन समाज को समाधान से जोड़ता है”
डायरेक्टर ऑपरेशन्स आराधना गलगोटिया ने कहा—
“मेडिएशन समाज को विवादों से नहीं, समाधान से जोड़ता है। गलगोटिया विश्वविद्यालय व्यवहारिक विधिक शिक्षा के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों को सामाजिक न्याय की दिशा में सक्षम बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।”
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने साझा किया अनुभव
आईमास से जुड़े विशेषज्ञ प्रशिक्षकों— जया गोयल, नगीना जैन, राजेश गुप्ता, दीपक कुमार ढींगरा, अनुपम ढींगरा एवं सुमेधा दुआ ने मेडिएशन के विभिन्न आयामों पर व्यावहारिक एवं अनुभव-आधारित सत्र लिए, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में इन कौशलों के प्रयोग की ठोस समझ विकसित हुई।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और विश्वविद्यालय ने भविष्य में भी ऐसे कौशल-आधारित एवं समाजोपयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।