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संस्कार से समाज निर्माण तक: दनकौर में मकर संक्रांति बना सांस्कृतिक चेतना का पर्व


मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी" / गौतमबुद्धनगर
सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल, दनकौर में संचालित सरस्वती संस्कार केन्द्र पर मकर संक्रांति का आयोजन केवल एक पारंपरिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह संस्कार, समरसता और समाज निर्माण का जीवंत मंच बनकर सामने आया। कार्यक्रम में बच्चों, शिक्षकों और समाज के लोगों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि संस्कार केन्द्र आज भी भारतीय जीवन मूल्यों की मजबूत नींव हैं।
कार्यक्रम का आयोजन रमेश चंद्र–चंद्र कांता देवी गोयल संस्कार केन्द्र, दनकौर के अंतर्गत किया गया। खण्ड संस्कार केन्द्र प्रमुख एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार गोयल के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
अनिल कुमार गोयल का विशेष उद्बोधन
अपने प्रेरक उद्बोधन में अनिल कुमार गोयल ने कहा कि—
“मकर संक्रांति हमें अंधकार से प्रकाश, निष्क्रियता से कर्म और स्वार्थ से समाज के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। संस्कार केन्द्रों का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारी नागरिक और राष्ट्र के जिम्मेदार सिपाही के रूप में गढ़ना है।”
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में जब भौतिकता तेजी से बढ़ रही है, तब संस्कार केन्द्र बच्चों के चरित्र निर्माण की सबसे मजबूत प्रयोगशाला हैं। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को ऐसे आयोजनों से जोड़ें, जिससे उनमें अनुशासन, सेवा, सहयोग और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित हो।
मकर संक्रांति का सामाजिक संदेश
इस अवसर पर BDRD सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दनकौर के प्रधानाचार्य जय प्रकाश सिंह ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सूर्य का उत्तरायण होना समाज में समता, एकरूपता और समभाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वर्ष में आयोजित छह प्रमुख कार्यक्रमों में मकर संक्रांति का विशेष स्थान इसी कारण है।
कार्यक्रम में संस्कार केन्द्र के 46 भैया-बहिनों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने वातावरण को जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर नरेंद्र कुमार शर्मा, नीतू सिंह, विनिता जी, कु. भावना शर्मा, कु. सोनिया, कु. चाहत, कु. वंशिका, भैया ललन कुमार सहित अनेक शिक्षक, कार्यकर्ता एवं समाज के लोग उपस्थित रहे।
अंत में प्रधानाचार्य देवदत्त शर्मा ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में संस्कृति, संस्कार और सामाजिक दायित्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
👉 विशेष दृष्टिकोण:
यह आयोजन यह संदेश देता है कि मकर संक्रांति जैसे पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार, समरसता और राष्ट्रबोध से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं—जहां शिक्षा जीवन निर्माण का आधार बनती है।