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कलियुग के प्रवेश और भागवत श्रवण से मोक्ष का मार्ग: बिरौडा में भागवत कथा का तृतीय अध्याय भावविभोर कर गया

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के ग्राम बिरौडा, सेक्टर पाई-1 स्थित बाबा मोहन राम मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय अध्याय में मंगलवार को आध्यात्मिक चेतना का विशेष दृश्य देखने को मिला। व्यास पीठ से कथावाचक संगीता शास्त्री ने कथा को एक गूढ़ और समसामयिक एंगल देते हुए राजा परीक्षित, कलियुग के आरंभ और भागवत श्रवण की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया।
कथावाचन के दौरान संगीता शास्त्री ने कहा कि अभिमन्यु पुत्र राजा परीक्षित का जीवन पवित्रता, धर्म और न्याय का प्रतीक था। वे कुरुजांगल देश के महान सम्राट थे और प्रजा के कल्याण के लिए सदैव सजग रहते थे। जब राजा परीक्षित को ज्ञात हुआ कि उनके राज्य में कलियुग का प्रवेश हो चुका है, तो वे सेना के साथ दिग्विजय के लिए निकल पड़े, ताकि अधर्म का अंत किया जा सके।
कथा का सबसे गहन प्रसंग तब आया जब कथावाचक ने बताया कि कलि पुरुष की सबसे बड़ी इच्छा थी कि वह राजा परीक्षित के शरीर में प्रवेश कर जाए, क्योंकि कलि जानता था कि “जब राजा बिगड़ता है, तो प्रजा स्वयं बिगड़ जाती है”। यही कारण है कि धर्मात्मा राजा परीक्षित कलियुग के लिए सबसे बड़ी चुनौती थे।
संगीता शास्त्री ने भागवत का सार समझाते हुए कहा कि भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि साक्षात भगवान का अनुभव है। भागवत श्रवण से ज्ञान के द्वार खुलते हैं, वैराग्य जागृत होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। आज के कलियुगी समय में भागवत ही मानव को धर्म, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं से भरा रहा। ग्राम के अनेक गणमान्य लोगों की विशेष उपस्थिति रही, जिनमें
चैनपाल प्रधान, राकेश नंबरदार, प्रशांत, नरेंद्र मावी, ओमवीर प्रधान, रवि भाटी, कंवर सिंह भाटी, धर्मवीर नंबरदार, गोपी नंबरदार, अशोक भाटी, प्रमोद मुखिया, जितेंद्र भाटी, महावीर, रतिराम और संतराम प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
भागवत कथा का यह तृतीय अध्याय केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कलियुग में धर्म की रक्षा और आत्मशुद्धि का संदेश बनकर उभरा, जिसने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, विवेक और वैराग्य का संचार कर दिया।