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“आबादी निस्तारण नहीं तो वोट नहीं” — किसान एकता संघ का यमुना प्राधिकरण के खिलाफ निर्णायक एलान

  मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/ यीडा सिटी
यमुना प्राधिकरण से जुड़ी आबादी निस्तारण की जटिल समस्या को लेकर अब किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है। रविवार को ऊँची दनकौर स्थित पंजाये वाले मंदिर पर आयोजित किसान एकता संघ की अहम बैठक में साफ संदेश दिया गया कि यदि वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन सड़क से सत्ता तक पहुंचेगा।
बैठक की अध्यक्षता नारायण सैनी ने की, जबकि संचालन जिला अध्यक्ष पप्पे नागर ने किया। बैठक में मौजूद किसानों की बड़ी भीड़ यह संकेत दे रही थी कि अब यह मुद्दा केवल मांग नहीं, बल्कि जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
🔴 “काम नहीं तो वोट नहीं” का एलान
संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सोरन प्रधान ने दो टूक शब्दों में कहा कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आबादी निस्तारण की समस्या को लेकर जल्द ही क्षेत्रीय विधायक और सांसद का घेराव किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समाधान नहीं हुआ तो आने वाले चुनावों में भाजपा का बहिष्कार किया जाएगा।
“चुनाव के समय बड़े वादे होते हैं, लेकिन जीत के बाद जनता की समस्याओं को भुला दिया जाता है। अबकी बार काम नहीं तो वोट नहीं,” — चौधरी सोरन प्रधान
🟡 फरवरी में विशाल पंचायत का ऐलान
बैठक में निर्णय लिया गया कि फरवरी माह में यमुना प्राधिकरण पर विशाल किसान पंचायत का आयोजन किया जाएगा। यह पंचायत तब तक जारी रहेगी, जब तक किसानों की आबादी निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता।
संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
🟢 किसान बोले — अब निर्णायक दौर
किसानों ने कहा कि वर्षों से वे प्राधिकरण के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न सुनवाई हुई और न समाधान। अब किसान एकजुट होकर जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब मांगेंगे।
👥 बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
चौधरी सोरन प्रधान, देशराज नागर, दुर्गेश शर्मा, श्रीकृष्ण बैंसला, राजसिंह ठेकेदार, सतवीर भाटी, जेपी नागर, पप्पे नागर, जीतन नागर, जोरा भाटी, कृष्ण मास्टर, सुरेंद्र चपरगढ़, उमरु प्रधान, उम्मेद एडवोकेट, मनोज नागर, अखिलेश प्रधान, सचिन नागर, ओमवीर, अजय ठाकुर, गंगाराम, दीपु सैनी, राकेश सैनी, गुड्डू एडवोकेट, प्रमोद सैनी, सुभाष सैनी, धारा नागर, हरिश सैनी, बबलू सैनी, ललित सैनी, सोनू सैनी, संजय सैनी, प्रमोद नागर, अर्जुन सैनी, लक्ष्मण सैनी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
✍️ "विजन लाइव" का विश्लेषण
यह बैठक केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी में किसान राजनीति के नए संकेत दे रही है।
यमुना प्राधिकरण के खिलाफ उठती यह हुंकार आने वाले समय में चुनावी समीकरण बदलने की ताकत रखती है।
अब सवाल यह नहीं कि किसान आंदोलन करेंगे या नहीं — सवाल यह है कि जनप्रतिनिधि किसानों की बात कब सुनेंगे?