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स्मृतियों में जीवित सेवा संस्कार: स्व. श्यामलाल की प्रथम पुण्यतिथि बनी सामाजिक एकता का साक्ष्य

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
सफीपुर क्षेत्र में समाजसेवा और मानवीय मूल्यों की गहरी छाप छोड़ने वाले स्वर्गीय बाबूजी श्री श्यामलाल की प्रथम पुण्यतिथि केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि यह दिन सेवा को संकल्प में बदलने का प्रतीक बन गया। समाजसेवी एवं पूर्व जिला पंचायत प्रत्याशी बालकिशन सफीपुर के पिता स्व. श्यामलाल की पुण्यतिथि पर क्षेत्र के दूरदराज गांवों से बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः हवन-पूजन से हुई, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कर दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों ने स्व. श्यामलाल के सरल, सेवाभावी और प्रेरणादायक जीवन को याद किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम को एक विशेष सामाजिक एंगल तब मिला जब बालकिशन सफीपुर ने अपने पिता की स्मृति में एक स्थायी और जनहितकारी घोषणा की। उन्होंने बताया कि दादरी स्थित मिहिर भोज डिग्री कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बाबूजी श्री श्यामलाल की स्मृति में एक अध्ययन कक्ष (कमरा) का निर्माण कराया जाएगा। इस घोषणा को उपस्थित लोगों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक दूरदर्शी और प्रेरक पहल बताया।
श्रद्धांजलि सभा के बाद सभी आगंतुकों ने प्रसाद ग्रहण किया और परिवार को सांत्वना दी। लोगों का कहना था कि स्व. श्यामलाल भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी सोच और सेवा की परंपरा आज भी जीवित है, जिसे उनके पुत्र बालकिशन सफीपुर आगे बढ़ा रहे हैं।
यह पुण्यतिथि कार्यक्रम यह संदेश देकर गया कि सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों में नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्यों में होती है—और स्व. श्यामलाल की स्मृति में की गई यह शिक्षा पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य उपहार होगी।