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रोड सेफ्टी मॉडल बना मिसाल:- तीन दिन का अभियान, लेकिन लक्ष्य स्थायी सुरक्षा


ग्रेनो प्राधिकरण का रोड सेफ्टी मॉडल बना मिसाल, ब्लैक स्पॉट पर फोकस और जनता की भागीदारी से बदलेगी सड़कों की तस्वीर
   
 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा में सड़क हादसों पर लगाम कसने की दिशा में प्राधिकरण ने इस बार केवल औपचारिक अभियान नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म रोड सेफ्टी प्लान की नींव रखी है। तीन दिवसीय रोड सेफ्टी अभियान भले ही बुधवार को समाप्त हो गया हो, लेकिन असली काम अब शुरू हुआ है। यह अभियान प्रशासनिक खानापूर्ति नहीं, बल्कि ब्लैक स्पॉट आधारित एक्शन प्लान बनकर सामने आया है।
सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत रही आठ वर्क सर्किलों की फील्ड पर मौजूदगी और डेटा आधारित कार्रवाई। शहर की 16 संवेदनशील जगहों को चिन्हित कर वहां तुरंत पैच वर्क, लेन मार्किंग, रंबल स्ट्रिप, रेफ्लेक्टर, कैट्स आई और लाइटिंग जैसे सुरक्षा उपाय किए गए, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सके।
अब सड़कें नहीं, आदतें बदलेगा अभियान
महाप्रबंधक एके सिंह के नेतृत्व में यह अभियान एक नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा, जिसमें सिर्फ सड़क सुधार नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा आदतों में बदलाव को लक्ष्य बनाया गया है। खुद एके सिंह का 130 मीटर रोड का निरीक्षण इस बात का संकेत है कि प्राधिकरण अब मॉनिटरिंग को गंभीरता से ले रहा है।
नेफोवा और जनता भी बनीं भागीदार
इस अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रहा नागरिक सहभागिता। नेफोवा द्वारा ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चिन्हित किए गए स्पॉट्स को भी प्राधिकरण ने अपने एक्शन प्लान में शामिल किया है। साथ ही पहली बार एरिया वाइज वर्क सर्किल प्रभारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए गए हैं, जिससे आम लोग सीधे खतरे की सूचना दे सकें। यह कदम प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अभियान नहीं, निरंतर प्रक्रिया
प्राधिकरण का स्पष्ट संदेश है कि रोड सेफ्टी अब तीन दिन का कार्यक्रम नहीं, निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। बदलती ट्रैफिक जरूरतों और बढ़ते शहरी दबाव के बीच ग्रेटर नोएडा में यह मॉडल भविष्य के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
👉 साफ संकेत है – अब सड़क हादसे ‘दुर्घटना’ नहीं, बल्कि ‘रोकी जा सकने वाली घटना’ माने जाएंगे, और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उसी दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।