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मनरेगा नहीं, मजदूरों का अधिकार बचाने की लड़ाई है यह अनशन

  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित जिला मुख्यालय पर हुआ एक दिवसीय अनशन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण भारत के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा कानून मनरेगा के भविष्य को लेकर उठी एक गंभीर चेतावनी थी।
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के मूल स्वरूप में बदलाव और उसे तथाकथित “जी-राम-जी” प्रणाली से जोड़ने के प्रयासों के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी गौतमबुद्ध नगर ने इसे “मनरेगा बचाओ संग्राम” के रूप में जनता के सामने रखा।
इस अनशन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने किया, लेकिन मंच पर दिखाई दी उससे कहीं बड़ी तस्वीर—गांव, पंचायत और मजदूर वर्ग की साझा चिंता।
नाम बदलने से लेकर अधिकार छीनने तक का आरोप
अनशन के दौरान कांग्रेस नेताओं और ग्रामीण मजदूरों ने यह सवाल उठाया कि
क्या मनरेगा का नाम बदलकर और उसकी प्रक्रिया को जटिल बनाकर सरकार रोजगार की कानूनी गारंटी को खत्म करना चाहती है?
दीपक भाटी चोटीवाला ने सीधे शब्दों में कहा कि
“मनरेगा कोई योजना नहीं, बल्कि गरीब के हाथ में दिया गया अधिकार है।
नाम बदलने से गरीबी नहीं मिटती, लेकिन अधिकार जरूर छिन जाते हैं।”
उनका आरोप था कि जी-राम-जी व्यवस्था के तहत
काम की मांग आधारित प्रणाली कमजोर हो रही है
मजदूरी भुगतान में देरी बढ़ रही है
ग्रामीण मजदूरों को काम मिलने में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं
जो सीधे तौर पर मनरेगा कानून की भावना के खिलाफ है।
ग्रामीण आवाज़ बनी आंदोलन की ताकत
इस अनशन की खास बात यह रही कि इसमें केवल कांग्रेस कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि
पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामीण मजदूर, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
यह उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि मनरेगा का मुद्दा अब राजनीति से आगे बढ़कर जनजीवन से जुड़ा सवाल बन चुका है।
ज्ञापन और चेतावनी—आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा
कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन के माध्यम से उपजिलाधिकारी द्वारा महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें प्रमुख मांगें रखी गईं—
जी-राम-जी व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए
मनरेगा को उसके मूल नाम और स्वरूप में बहाल किया जाए
रोजगार की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए
मजदूरी भुगतान में देरी बंद हो
मनरेगा बजट में कटौती रोकी जाए
जिला कांग्रेस कमेटी ने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मनरेगा के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं की, तो यह संघर्ष गांव-गांव और पंचायत-पंचायत तक ले जाया जाएगा।
"विजन लाइव" का विश्लेषण
सूरजपुर में हुआ यह अनशन एक दिन का कार्यक्रम जरूर था,
लेकिन इसके सवाल लंबे हैं—
क्या ग्रामीण भारत से रोजगार का अधिकार छीना जा रहा है?
और क्या मनरेगा अब सिर्फ नाम बदलकर अपनी आत्मा खो देगा?
“मनरेगा बचाओ संग्राम” ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई सिर्फ योजना की नहीं,
बल्कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार की है।