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ग्राइंडर हादसे में कटा अंगूठा जुड़ा, माइक्रो सर्जरी ने लौटाया जीवन का सहारा



समय, तकनीक और विशेषज्ञता ने रचा मेडिकल चमत्कार
 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा में एक ग्राइंडर मशीन हादसे ने एक इलेक्ट्रिशियन की जिंदगी पल भर में बदल दी। काम के दौरान मशीन हाथ से फिसलने से उनका अंगूठा पूरी तरह जड़ से कट गया। गंभीर स्थिति में कटे हुए अंगूठे को साथ लेकर मरीज कई अस्पतालों में भटका, लेकिन केस की जटिलता के चलते हर जगह से निराशा ही हाथ लगी।
उम्मीद की आखिरी किरण बनकर सामने आया यथार्थ हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा यूनिट, जहां समय पर लिया गया सही फैसला और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने असंभव को संभव कर दिखाया।
यथार्थ हॉस्पिटल के डॉ. सौरभ के. गुप्ता, डायरेक्टर एवं हेड – प्लास्टिक, एस्थेटिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी ने बताया कि शरीर के किसी अंग के पूरी तरह कट जाने के बाद पहले 6 घंटे ‘गोल्डन पीरियड’ होते हैं। इसी दौरान माइक्रोस्कोपिक तकनीक से नसों और रक्त वाहिकाओं को जोड़कर अंग को फिर से जीवित किया जा सकता है।
इस केस में सबसे बड़ी चुनौती थी, कटे हुए अंगूठे की बेहद बारीक नसों और रक्त वाहिकाओं को हाथ से इस तरह जोड़ना कि रक्त प्रवाह दोबारा शुरू हो सके। इस जटिल प्रक्रिया को माइक्रो सर्जिकल रिप्लांटेशन कहा जाता है, जो देश के गिने-चुने अस्पतालों में ही संभव है।
मरीज की हालत को देखते हुए बिना समय गंवाए उसे तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।
डॉ. सौरभ के. गुप्ता, डॉ. ईदेन बिलाल सहित तीन प्लास्टिक सर्जनों की टीम ने करीब 4.5 से 5 घंटे तक चली अत्यंत जटिल माइक्रो सर्जरी के बाद अंगूठे को सफलतापूर्वक जोड़ दिया।
आज मरीज पूरी तरह स्वस्थ है, उसकी रिकवरी संतोषजनक है और अंगूठे में धीरे-धीरे संवेदनाएं लौट रही हैं। मरीज और उसके परिजनों ने इसे “दूसरा जीवन” बताते हुए डॉक्टरों की टीम का आभार जताया।
डॉ. सौरभ का कहना है कि ऐसी दुर्घटनाएं आम हैं, लेकिन सही समय पर सही अस्पताल और आधुनिक चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो गंभीर से गंभीर चोट का भी सफल इलाज संभव है।
माइक्रोस्कोपिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधा के जरिए यथार्थ हॉस्पिटल लगातार मेडिकल क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा रहा है।