BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts


 

शहीदों की स्मृतियों पर संकट! किसान आंदोलन अब केवल ज़मीन का नहीं, सम्मान और इतिहास की लड़ाई बना


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
भारतीय किसान यूनियन मंच के नेतृत्व में स्वाधीनता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पीतम सिंह भाटी के स्मृति स्थल को बचाने के लिए चल रहा धरना अब दूसरे दिन और अधिक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। यह आंदोलन अब सिर्फ एक समाधि स्थल की रक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान, ग्रामीण अस्मिता और ऐतिहासिक विरासत को बचाने की लड़ाई बन चुका है।
वार्ता विफल, संघर्ष तेज
राष्ट्रीय महासचिव मास्टर मनमिंदर भाटी ने बताया कि आज ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण से कोई वार्ता नहीं हो सकी, जिसके बाद समस्त ग्रामीणों और किसान संगठनों ने एकमत से बड़ा निर्णय लिया है।
➡ 12 जनवरी को ग्राम खेड़ा चौगानपुर स्थित समाधि स्थल पर विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें क्षेत्र के सभी प्रमुख किसान संगठन शामिल होंगे।
➡ जब तक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और संबंधित बिल्डर समाधान नहीं करते, धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
🔥 “यह केवल समाधि नहीं, इतिहास पर हमला है”
जिलाध्यक्ष अक्षय मुखिया ने तीखे शब्दों में कहा—
“ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण लगातार किसानों का शोषण कर रहा है। हमारे बुजुर्गों, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को आज तक सम्मान नहीं मिला। यह आंदोलन उसी अपमान के खिलाफ है।”
🕯️ वंशजों का आक्रोश: स्मृति मिटाने की साजिश
स्वर्गीय पीतम सिंह भाटी जी के पौत्र प्रदीप भाटी ने भावुक होकर कहा—
“प्राधिकरण और बिल्डर हमारे दादा जी की स्मृति को ध्वस्त करने की साजिश कर रहे हैं। लेकिन हमारा गांव और पूरा क्षेत्र उनके मंसूबों को कभी पूरा नहीं होने देगा।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष पीढ़ियों की विरासत को बचाने का संकल्प है।
👥 व्यापक समर्थन
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से
धर्म सिंह भाटी, विनोद पाली, रोहतास भाटी, धर्मवीर विकल, अक्षय चौधरी, नवाब प्रधान, गोविंद सिंह, रविंद्र, सोनू भाटी, धीरज सिंह, सुशील भाटी सहित अन्य किसान शामिल रहे।
📌 "विजन लाइव" का विश्लेषण
यह आंदोलन अब भूमि अधिग्रहण या निर्माण विवाद नहीं, बल्कि
👉 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृतियों की रक्षा
👉 ग्रामीण सम्मान और ऐतिहासिक चेतना
👉 प्राधिकरण बनाम जनता
की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।
12 जनवरी की महापंचायत इस संघर्ष की दिशा और दशा तय करेगी।