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शारदा विश्वविद्यालय में 6-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का भव्य शुभारंभ

 Vision Live / ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान एवं जैव रसायन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित 6-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का विश्वविद्यालय परिसर में विधिवत शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का केंद्रीय विषय “विज्ञान और समाज को जोड़ना” है, जिसका उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक सरोकारों के बीच मजबूत सेतु स्थापित करना है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र (IUAC), नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर अविनाश कुमार पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बनना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि आधारभूत शिक्षा को प्रज्ञा-विकास आधारित शिक्षा से जोड़ा जाए, ताकि नवाचार और अनुसंधान सीधे सामाजिक जरूरतों से जुड़ सकें।
शारदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर आर.पी. सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को अविवेकपूर्ण उपभोग की मानसिकता से बाहर निकलकर विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग की दिशा में आगे बढ़ना होगा। तभी सतत विकास के लक्ष्यों को व्यवहार में उतारा जा सकेगा।
विश्वविद्यालय के उप-कुलाधिपति वाई.के. गुप्ता ने एफडीपी के आयोजन के लिए विभागीय शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और अकादमिक संगठनों से शिक्षक, शोधार्थी एवं विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जिससे शैक्षणिक सहयोग, अनुभव साझा करने और नवाचार को नई दिशा मिलेगी।
डीन रिसर्च प्रोफेसर भुवनेश कुमार ने कहा कि यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों और शोधकर्ताओं को विज्ञान की सामाजिक प्रासंगिकता, सतत समाधान, हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार आधारित अनुसंधान दृष्टिकोण से परिचित कराएगा। इससे शिक्षण और शोध की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम अग्रवाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि छह दिनों तक चलने वाले इस एफडीपी में विशेषज्ञ व्याख्यान, इंटरैक्टिव सत्र, केस स्टडी, कार्यशालाएं और अंतर्विषयक चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विज्ञान और समाज के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में शिक्षा और शोध की भूमिका को सुदृढ़ करना है।
उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ प्रोफेसर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे, जिनमें प्रोफेसर आर.सी. सिंह, प्रोफेसर एन.बी. सिंह, प्रोफेसर श्यामल बनर्जी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शोधार्थी शामिल थे। कार्यक्रम को लेकर प्रतिभागियों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।