BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts


 

जब फैक्ट्री बनी परिवर्तन की प्रयोगशाला: मिशन शक्ति 5.0 ने उद्योगों में महिला सशक्तिकरण को दी नई दिशा

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
स्पेशल न्यूज़ स्टोरी | ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक मानचित्र पर 9 जनवरी 2026 का दिन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम के रूप में दर्ज नहीं हुआ, बल्कि यह दिन औद्योगिक भारत में महिला सशक्तिकरण की सोच को नई दिशा देने वाला मील का पत्थर साबित हुआ। इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (IBA) एवं ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महिला सशक्तिकरण मिशन शक्ति 5.0 एवं फैक्ट्री–शॉप एक्ट जागरूकता शिविर ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब महिला सुरक्षा और श्रमिक अधिकार उद्योगों के लिए वैकल्पिक विषय नहीं, बल्कि मुख्यधारा की औद्योगिक नीति का हिस्सा बन चुके हैं।
कार्यस्थल से सामाजिक बदलाव तक
कार्यक्रम का आयोजन किसी सभागार या होटल में नहीं, बल्कि एक सक्रिय औद्योगिक इकाई — आर्या फैशन्स के परिसर में किया गया। यह चयन अपने आप में एक मजबूत संदेश था कि जहाँ महिलाएं काम करती हैं, वहीं से बदलाव की शुरुआत होनी चाहिए। लगभग 150 से अधिक महिलाएं एवं 70–80 उद्यमियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि उद्योग अब केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के केंद्र भी बन रहे हैं।
कानूनी जागरूकता: डर से विश्वास की ओर
फैक्ट्री एवं शॉप एक्ट को अक्सर उद्योगों में जटिल और दंडात्मक कानून के रूप में देखा जाता है। लेकिन इस जागरूकता शिविर में पहली बार इसे
श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा
महिला कर्मचारियों की गरिमा
उद्योगों को कानूनी मजबूती
निवेश के अनुकूल वातावरण
से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
सहायक निदेशक कारखाना अंशुल तिवारी ने सरल भाषा में समझाया कि पंजीकरण से उद्योग कानूनी जोखिमों से बचते हैं, कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा मिलती है और सरकार की 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की परिकल्पना को मजबूती मिलती है। यह सत्र उद्यमियों के लिए आंख खोलने वाला रहा।
महिला सुरक्षा: अब केवल पुलिस का विषय नहीं
पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा) मनीषा सिंह ने मिशन शक्ति को केवल सरकारी योजना मानने की सोच को खारिज करते हुए कहा कि महिला सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। थानों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों, महिला हेल्पडेस्क और त्वरित सहायता तंत्र की जानकारी देकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानून महिलाओं के साथ खड़ा है, न कि केवल कागज़ों में, बल्कि ज़मीन पर।
GNIDA का स्पष्ट रोडमैप
GNIDA के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल के बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं। उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में
श्रमिक सुविधा केंद्र
सार्वजनिक शौचालय
बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण
जैसी योजनाएं केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि मानवीय औद्योगिक नीति का हिस्सा हैं। GNIDA के सीईओ एन. जी. रवि कुमार के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य उद्योगों को बाधा नहीं, बल्कि सहयोग प्रदान करना है।
सम्मान से आत्मविश्वास तक
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं, औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत महिला कर्मचारियों, GNIDA की महिला सफाई कर्मियों और फैक्ट्रियों में काम करने वाली महिलाओं का सम्मान यह दर्शाता है कि हर श्रम का मूल्य समान है। यह सम्मान महिलाओं के आत्मविश्वास को सशक्त करने वाला क्षण बना।
IBA की भूमिका: सेतु बनता संगठन
IBA अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने कहा कि महिला सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता ही सशक्त समाज की नींव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि IBA केवल उद्योगों का संगठन नहीं, बल्कि उद्योग और प्रशासन के बीच सेतु बनकर जागरूकता, सरल अनुपालन और सकारात्मक संवाद की भूमिका निभा रहा है। फैक्ट्री–शॉप एक्ट को उन्होंने उद्योगों की दीर्घकालिक स्थिरता का आधार बताया।
महिला नेतृत्व की प्रेरक मिसाल
इस आयोजन का भावनात्मक केंद्र IBA की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. खुशबू सिंह रहीं। एक महिला उद्यमी और नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्होंने अपने ही फैक्ट्री परिसर में इस व्यापक आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित कर यह साबित किया कि महिला सशक्तिकरण मंच से नहीं, कर्म से आगे बढ़ता है। महिला आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उनके प्रयासों को प्रशासन और पुलिस द्वारा सम्मानित किया जाना, आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना।
मीडिया की भूमिका
कार्यक्रम में मीडिया की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि महिला सशक्तिकरण जैसे विषय अब केवल सामाजिक खबर नहीं, बल्कि मुख्यधारा की औद्योगिक और विकास संबंधी खबरें बन चुकी हैं। मीडिया ने इस पहल को व्यापक समाज तक पहुंचाने का कार्य किया।
स्पेशल एंगल: क्यों है यह आयोजन अलग
👉 यह आयोजन इसलिए विशेष रहा क्योंकि यहां
फैक्ट्री को सामाजिक बदलाव का मंच बनाया गया
कानून को बाधा नहीं, विकास का साधन बताया गया
महिला सुरक्षा को CSR नहीं, Core Industrial Responsibility माना गया
सम्मान को औपचारिकता नहीं, प्रेरणा का माध्यम बनाया गया।
"Vision लाइव " का विश्लेषण 
ग्रेटर नोएडा का यह आयोजन संकेत देता है कि यदि औद्योगिक विकास को मानवीय संवेदनशीलता से जोड़ा जाए, तो महिला सशक्तिकरण केवल अभियान नहीं, बल्कि औद्योगिक संस्कृति बन सकता है।
मिशन शक्ति 5.0 के इस अध्याय ने यह साबित कर दिया कि सुरक्षित, जागरूक और संवेदनशील उद्योग ही सशक्त भारत की नींव रख सकते