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पीडीए जन पंचायत के बहाने सपा ने साधा 2027 का सामाजिक समीकरण


नूरपुर से दादरी तक जनाक्रोश की आवाज़, भाजपा पर सीधा हमला
 मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/ग्रेटर नोएडा
गांव नूरपुर में आयोजित पीडीए जन पंचायत सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति का स्पष्ट संकेत बनकर उभरी। समाजवादी बाबा साहब वाहिनी के प्रदेश सचिव एडवोकेट अबरार राणा के संयोजन में हुए इस आयोजन ने यह संदेश दे दिया कि सपा अब पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वर्ग को एकजुट कर सीधे सत्ता की राजनीति में निर्णायक हस्तक्षेप की तैयारी में है।
जन पंचायत को संबोधित करते हुए सपा जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा शासन में किसान, मजदूर, महिलाएं और वंचित वर्ग सबसे अधिक पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि “जनता के हक की बात करना अपराध बन गया है।”
इस जनसभा का खास एंगल यह रहा कि मंच से सिर्फ सरकार की आलोचना ही नहीं हुई, बल्कि सपा शासनकाल के विकास मॉडल को जनता के सामने दोबारा रखा गया। सुधीर भाटी ने याद दिलाया कि सपा सरकार में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में बड़े काम हुए, लेकिन भाजपा सरकार में विकास की रफ्तार थम गई है।
भाजपा पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप
जन पंचायत में वक्ताओं ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए समाज को बांटने का आरोप लगाया। कहा गया कि देश और प्रदेश में भाईचारा कमजोर हुआ है और महंगाई, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो चुके हैं।
कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं — इंदर प्रधान, परमेन्द्र भाटी, मुकेश सिसोदिया, श्याम सिंह भाटी, राजू नंबरदार, हरवीर प्रधान, विजेंद्र नागर, प्रशांत भाटी, मोहित नागर, खुर्शीद राणा, मंसूर रिजवी, रिजवान, दिलाशाद, सलीम, राजेश बैसला — की मजबूत मौजूदगी ने यह दिखा दिया कि पीडीए जन पंचायत अब केवल मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्राउंड लेवल पर सामाजिक गोलबंदी का रूप ले चुकी है।
राजनीतिक संकेत
राजनीतिक जानकारों की मानें तो दादरी क्षेत्र में इस तरह की पंचायतें आने वाले समय में तेज होंगी। सपा का फोकस साफ है — सीधे जनता से संवाद, स्थानीय मुद्दे और सामाजिक न्याय का एजेंडा। नूरपुर की जन पंचायत इस दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।