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किसान एकता संघ के माध्यम से और समाजवादी विचारधारा के अनुरूप किसानों व पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई आगे भी लड़ता रहूंगा: चेची

“किसान, इंसानियत और संस्कृति — चौधरी शौकत अली चेची से विशेष बातचीत”
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
यह इंटरव्यू स्पष्ट रूप से बताता है कि चौधरी शौकत अली चेची। भारतीय किसान यूनियन अंबावता, भाकियू बलराज, भाकियू पथिक जैसे संगठनों से होते हुएवर्तमान में किसान एकता संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, और समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के सचिव हैं। वे नेताजी मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक सोच से प्रेरित, जमीन से जुड़े, मानवतावादी और किसानों के भरोसेमंद नेता के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। प्रस्तुत है चौधरी शौकत अली चेची के "विजन लाइव "से खास बातचीत के प्रमुख अंश:--
प्रश्न 1 :
चौधरी साहब, सबसे पहले आप अपने बारे में संक्षेप में बताइए। किसान राजनीति में आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई?
उत्तर :
मैं मूल रूप से एक किसान हूं और खेती-किसानी से ही मेरी पहचान है। गौतम बुद्ध नगर जिले के ग्रामीण क्षेत्र से मेरा संबंध रहा है, जहां किसानों की समस्याएं मैंने बचपन से देखीं और खुद भी झेलीं।
इन्हीं अनुभवों ने मुझे किसान आंदोलनों से जोड़ा। मेरी किसान राजनीति की यात्रा भारतीय किसान यूनियन अंबावता से शुरू हुई। इसके बाद मैंने भारतीय किसान यूनियन बलराज, भारतीय किसान यूनियन पथिक और किसान एकता संघ जैसे संगठनों के साथ जुड़कर किसानों के हक के लिए संघर्ष किया।
आज मैं किसान एकता संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में किसानों के हितों की लड़ाई लड़ रहा हूं। इसके साथ ही मैं वर्तमान में समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का सचिव भी हूं।
प्रश्न 2 :
आपको एक मानवतावादी सोच वाला नेता माना जाता है। आप अपनी विचारधारा को कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर :
मेरी राजनीति की जड़ इंसानियत है। किसान, मजदूर, गरीब और पिछड़ा वर्ग — यही मेरी प्राथमिकता हैं।
मैं नेताजी मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक सोच से पूरी तरह इत्तेफाक रखता हूं। उनका मानना था कि राजनीति का उद्देश्य समाज के आखिरी व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना होना चाहिए। मैं भी उसी विचारधारा पर चलते हुए जमीन से जुड़ी राजनीति करता हूं।
प्रश्न 3 :
आप बिजली दरों, किसानों की आय और आर्थिक मुद्दों पर लगातार मुखर रहते हैं। यह संघर्ष क्यों जरूरी है?
उत्तर :
क्योंकि किसान की लागत लगातार बढ़ रही है और आमदनी घट रही है। बिजली, खाद, बीज और सिंचाई — सब कुछ महंगा हो चुका है।
इसी वजह से मैंने अलग-अलग किसान संगठनों के माध्यम से आंदोलन किए, ज्ञापन सौंपे और सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाई। यह संघर्ष केवल आर्थिक नहीं, बल्कि किसान के सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है।
प्रश्न 4 :
समाजवादी पार्टी में आपकी भूमिका और वहां से मिली राजनीतिक समझ को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर :
समाजवादी पार्टी ने मुझे सामाजिक न्याय की राजनीति को गहराई से समझने का अवसर दिया।
पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के सचिव के रूप में काम करते हुए मैंने महसूस किया कि जब तक किसान, पिछड़ा और गरीब वर्ग मजबूत नहीं होगा, तब तक समाज संतुलित नहीं हो सकता। नेताजी मुलायम सिंह यादव की सोच इसी दिशा में रही है, और मैं उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा हूं।
प्रश्न 5 :
आप पर कभी जाति या धर्म आधारित राजनीति करने का आरोप नहीं लगता। इसका क्या कारण मानते हैं?
उत्तर :
क्योंकि मैं किसान को उसकी मेहनत से पहचानता हूं, न कि उसकी जाति या धर्म से।
किसान यूनियनों में काम करते हुए मैंने हर जाति और हर धर्म के किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया है। ईद हो या दीपावली, होली हो या गणतंत्र दिवस — मैं हर पर्व को साझा संस्कृति के रूप में देखता हूं।
प्रश्न 6 :
आप क्षेत्रीय स्तर पर अधिक सक्रिय रहते हैं। क्या यह आपकी रणनीति है?
उत्तर :
बिल्कुल। मेरी राजनीति का केंद्र गांव और खेत है।
मैं मानता हूं कि असली लड़ाई वही है, जहां किसान रोज़ की समस्याओं से जूझ रहा है। बड़े मंचों से ज्यादा जरूरी है कि हम किसानों के बीच रहकर उनकी लड़ाई लड़ें।
प्रश्न 7 :
राजनीति के साथ आपकी सांस्कृतिक पहचान — देहाती रागनी और होली गायन — भी चर्चा में रहती है।
उत्तर :
यह हमारी ग्रामीण संस्कृति की आत्मा है। देहाती रागनी और होली गायन में समाज का दर्द, हास्य और संदेश — सब कुछ होता है।
लोगों ने मुझे कई मंचों पर गाते हुए देखा है। यह मुझे अपनी मिट्टी, अपने लोगों और उनकी भावनाओं से जोड़े रखता है।
प्रश्न 8 :
युवाओं और किसानों के लिए आपका संदेश क्या है?
उत्तर :
युवाओं से कहूंगा कि अपनी जड़ों और संस्कृति को न भूलें।
किसानों से मेरी अपील है कि संगठन और एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जाति और धर्म से ऊपर उठकर जब किसान एक होगा, तभी उसकी आवाज मजबूत होगी।
प्रश्न 9 :
आने वाले समय में आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?
उत्तर :
मेरी प्राथमिकता साफ है — किसान की आय बढ़े, उस पर अनावश्यक बोझ न पड़े और गांव का सम्मान बना रहे।
मैं किसान एकता संघ के माध्यम से और समाजवादी विचारधारा के अनुरूप किसानों व पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई आगे भी लड़ता रहूंगा।