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न्याय से विकास तक: ग्रेटर नोएडा में किसानों के धैर्य की जीत, आबादी भूखंड बनेंगे भविष्य की नींव

  
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा में वर्षों से लंबित एक संवेदनशील मुद्दे का समाधान सोमवार को आखिरकार धरातल पर उतर आया। मथुरापुर और रिठौरी गांवों के किसानों के चेहरों पर जो मुस्कान दिखी, वह सिर्फ भूखंड मिलने की नहीं, बल्कि विश्वास की बहाली और अधिकार की स्वीकृति की कहानी कहती है।
भूमि अधिग्रहण के बाद छह फीसदी आबादी भूखंड का वादा इन किसानों के लिए लंबे समय से उम्मीद और प्रतीक्षा का विषय बना हुआ था। प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नियोजन संबंधी अड़चनों के कारण मामला अटका रहा, लेकिन किसानों ने अपनी आवाज को दबने नहीं दिया। उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार तक अपनी पीड़ा पहुंचाई। यही वह मोड़ था, जहां से समाधान की दिशा तय हुई।
सीईओ के स्पष्ट निर्देशों के बाद नियोजन विभाग ने तेजी दिखाई और जैसे ही भूखंडों का नियोजन पूरा हुआ, सोमवार को 10 किसानों को छह फीसदी आबादी भूखंड के आवंटन पत्र सौंप दिए गए। यह महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय का जीवंत उदाहरण था।
दादरी विधायक तेजपाल नागर की मौजूदगी ने इस पहल को राजनीतिक संवेदनशीलता और जनविश्वास का आयाम दिया। उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पारदर्शी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए इसे “किसानों के प्रति जवाबदेही का प्रतीक” बताया। वहीं, एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया यहीं नहीं रुकेगी—लीज प्लान, चेकलिस्ट और लीज डीड की कार्रवाई तय समय में पूरी की जाएगी, ताकि किसानों को किसी तरह की असुविधा न हो।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम संदेश सीईओ एनजी रवि कुमार का रहा—“किसानों को छह फीसदी आवासीय भूखंड देना प्राधिकरण की पहली प्राथमिकता है।” यह बयान संकेत देता है कि मथुरापुर और रिठौरी सिर्फ शुरुआत हैं, आने वाले समय में अन्य गांवों के पात्र किसानों को भी उनका हक मिलेगा।
कार्यक्रम में ओएसडी रामनयन सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक नियोजन सुधीर कुमार, प्रबंधक प्रमोद कुमार, संदीप रावल सहित कई अधिकारी मौजूद रहे, जो यह दर्शाता है कि यह फैसला सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि एक संस्थागत प्रतिबद्धता का परिणाम है।
आज मथुरापुर और रिठौरी के किसान सिर्फ भूखंड के मालिक नहीं बने हैं, बल्कि उन्होंने यह भरोसा भी पाया है कि विकास की दौड़ में उनकी हिस्सेदारी और सम्मान दोनों सुरक्षित हैं। यह कहानी है—संघर्ष, संवाद और समाधान की, जो ग्रेटर नोएडा के विकास मॉडल को एक मानवीय चेहरा देती है।