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दिल्ली विश्वविद्यालय में नए जी.ई. पेपर ‘भारतीय इतिहास में सिख शहादत’ पर दो दिवसीय बहुभाषी कार्यशाला संपन्न

Vision Live / दिल्ली

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ किए गए नए जनरल एलेक्टिव पेपर “भारतीय इतिहास में सिख शहादत – 1500 से 1765” पर दो-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन माता सुंदरी कॉलेज फॉर वीमेन में किया गया। यह कार्यशाला सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज़ (CIPS) और माता सुंदरी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में, निदेशक प्रो. रविंदर कुमार तथा प्रिंसिपल प्रो. हरप्रीत कौर के नेतृत्व में आयोजित की गई।

कार्यक्रम के उद्घाटन में दोनों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कुलपति ने अपने प्रगतिशील दृष्टिकोण से भारतीय इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय—सिख शहादत—को पाठ्यक्रम में शामिल कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसे औपनिवेशिक इतिहासकारों ने उपेक्षित रखा था।


कार्यशाला का उद्देश्य

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में नए जी.ई. कोर्स की शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाना था, ताकि विद्यार्थी भारतीय इतिहास को सिख शहादत के व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझ सकें। कार्यशाला को छह सत्रों में विभाजित किया गया।

उद्घाटन सत्र में—

  • मुख्य वक्ता: प्रो. जगबीर सिंह (चांसलर, केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, बठिंडा)
  • मुख्य अतिथि: प्रो. के. रतनाबली (डीन, अकादमिक)
  • विशिष्ट वक्ता: प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी (अध्यक्ष, CIPS)

इन्होंने भारतीय इतिहास, भारतीय ज्ञान परंपरा और सिख शहादत के महत्व पर विस्तृत विचार साझा किए।


बहुभाषी तकनीकी सत्र

आगे के पाँच तकनीकी सत्र पंजाबी, हिंदी और अंग्रेज़ी — तीनों भाषाओं में आयोजित किए गए।
प्रमुख शोधकर्ताओं और विद्वानों ने सिख इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण अध्यायों, शोध निष्कर्षों और जी.ई. कोर्स के मुख्य विषयों पर प्रस्तुति दी।

कार्यशाला का एक मुख्य उद्देश्य था—

  • शिक्षकों की तकनीकी शिक्षण दक्षता को बढ़ाना
  • अध्यापकों को तथ्य-प्रधान और प्रमाणिक ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करना
  • बहुभाषी शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों की समझ को विस्तृत करना

अकादमिक सत्रों के बाद हुए विचार-विमर्श में प्रतिभागियों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव और अनुभव साझा किए।


समापन सत्र

समापन सत्र में—

  • प्रो. चरण सिंह (CEO एवं संस्थापक निदेशक, ईग्रो फाउंडेशन) ने कार्यशाला के अंतरराष्ट्रीय विस्तार का सुझाव दिया।
  • प्रो. मनजीत सिंह, पूर्व जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ने भारतीय इतिहास में सिखों की महान शहादतों पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

अंत में प्रो. ज्योति त्रिहान, संयुक्त निदेशक, CIPS ने सभी अतिथियों, पैनल सदस्यों, विभिन्न कॉलेजों से आए अध्यापकों और तकनीकी टीम का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी अध्यापकों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।