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गलगोटिया विश्वविद्यालय में एसआईएच 2025 के चौथे दिन नवाचार अपने चरम पर, ओरोबोनिक्स टीम का ‘KRITRIM’ रोबोट आकर्षण का केंद्र


 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ यीडा सिटी
स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआईएच) 2025 के चौथे दिन गलगोटिया विश्वविद्यालय का परिसर नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता और रचनात्मक ऊर्जा से भरा रहा। देशभर से आई टीमों ने अपने-अपने प्रोटोटाइप को अंतिम स्वरूप देने की दिशा में जोर-शोर से काम जारी रखा। सभी प्रतिभागी अपने समाधान को और अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर शोध और सुधार में जुटे रहे।

इस बीच विश्वविद्यालय के छात्रों की नवाचार क्षमता ने भी राष्ट्रीय स्तर पर खास ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से विश्वविद्यालय की ओरोबोनिक्स टीम द्वारा विकसित मानवरूपी रोबोट ‘KRITRIM’ पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बना रहा। यह उन्नत रोबोट हॉस्पिटैलिटी, मेडिकल असिस्टेंस, ड्रोन ऑपरेशंस सहित कई तकनीकी क्षेत्रों में उपयोग किए जाने की क्षमता रखता है।

KRITRIM की खासियत
KRITRIM का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका उच्च-स्तरीय सुरक्षा और व्यवहारिक उपयोग है। इसे ऐसे वातावरण में भी कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहाँ मनुष्यों या पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए काम करना जोखिमपूर्ण होता है।
उदाहरण के तौर पर—
एमआरआई कक्ष, जहाँ अत्यधिक चुंबकीय क्षेत्र के कारण मानव हस्तक्षेप सीमित होता है। ऐसी स्थिति में KRITRIM आसानी से अपॉइंटमेंट चेक, वेरिफिकेशन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएँ संभाल सकता है।
रोबोट का पूरी तरह मॉड्यूलर डिज़ाइन इसे आसान मेंटेनेंस, तेज़ रिपेयर और पार्ट्स रिप्लेसमेंट की सुविधा प्रदान करता है।

टीमें बना रहीं बेहतर प्रोटोटाइप
चौथे दिन विभिन्न संस्थानों की टीमों ने अपने प्रोटोटाइप में इंटरफेस सुधार, फीचर्स अपग्रेड और आउटपुट क्वालिटी को बेहतर करने पर ध्यान केंद्रित किया। तकनीकी चर्चाएँ, मेंटर इंटरैक्शन और गहन समस्या-समाधान सत्रों ने पूरे कैंपस के माहौल को ऊर्जावान और नवाचारपूर्ण बना दिया।

सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया का वक्तव्य
डॉ. गलगोटिया ने कहा कि विश्वविद्यालय ने प्रतिभागियों को उत्कृष्ट तकनीकी सुविधाएँ, सतत मेंटरशिप और एक सशक्त इनोवेशन इकोसिस्टम प्रदान किया है, जिससे देशभर से आए प्रतिभागियों को अपने समाधान को बेहतर बनाने का अनुकूल वातावरण मिला।
उन्होंने बताया कि उद्योग विशेषज्ञों और फैकल्टी मेंटर्स की सलाह ने छात्रों को तकनीकी सुधार, व्यावहारिकता और उपयोगिता पर आधारित समाधान तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

देशभर से टीमों की शानदार भागीदारी
जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आई टीमों ने अपनी समस्या-समाधान क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
जैसे-जैसे प्रतियोगिता अंतिम मूल्यांकन चरण की ओर बढ़ रही है, यह स्पष्ट है कि भारत का युवा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और प्रभावी तकनीकी समाधान देने में समर्थ है।