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गौतमबुद्धनगर बार चुनाव 2025-26: अनुभव, संघर्ष और अधिवक्ता हितों का निर्णायक मुकाबला


मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन गौतमबुद्धनगर की कार्यकारिणी चुनाव वार्षिकी 2025-26 को लेकर कचहरी परिसर पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। मतदान कल दिनांक 24 दिसंबर 2025 को प्रातःकाल से प्रारंभ होगा। जैसे-जैसे मतदान का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे चुनावी सरगर्मियां और चर्चाएं तेज होती जा रही हैं।
अध्यक्ष पद पर साख और संघर्ष की सीधी टक्कर
अध्यक्ष पद के लिए इस बार मुकाबला बेहद रोचक और प्रतिष्ठापूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2003 में अध्यक्ष रह चुके एडवोकेट योगेंद्र भाटी एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। उनका मृदु, सौम्य और सहयोगी स्वभाव अधिवक्ताओं को आकर्षित करता नजर आ रहा है।
योगेंद्र भाटी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में वह कानूनी संघर्ष भी शामिल है, जब मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान मंडल और जिलों को समाप्त किए जाने के फैसले में गौतमबुद्धनगर जिला भी खत्म कर दिया गया था। उस समय योगेंद्र भाटी ने हाईकोर्ट में मजबूत कानूनी लड़ाई लड़ते हुए जिला बहाली सुनिश्चित कराई, जिस पर न्यायालय की अंतिम मुहर लगी। इस ऐतिहासिक भूमिका के चलते उन्हें अधिवक्ताओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
इसके साथ ही चैंबर विहीन अधिवक्ताओं को चैंबर उपलब्ध कराना इस बार भी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बना हुआ है।
वहीं दूसरी ओर दो बार अध्यक्ष रह चुके एडवोकेट मनोज भाटी (बोडाकी) अध्यक्ष पद के लिए पूरी मजबूती से चुनाव मैदान में हैं। अधिवक्ता हितों को लेकर हमेशा मुखर रहने वाले मनोज भाटी की पहचान एक संघर्षशील और जुझारू वकील नेता के रूप में है।
अनुभव की अनिवार्यता का बड़ा मुद्दा बना चुनावी हथियार
इस चुनाव में एडवोकेट मनोज भाटी (बोडाकी) ने एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाला मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अध्यक्ष पद के लिए न्यूनतम 25 वर्ष और सचिव पद के लिए 15 वर्ष के अधिवक्ता अनुभव को अनिवार्य किए जाने की मांग को प्रमुख चुनावी एजेंडे के रूप में सामने रखा है।
इस मुद्दे को केवल बयानबाजी तक सीमित न रखते हुए एडवोकेट मनोज भाटी (बोडाकी) की ओर से बार काउंसिल ऑफ इंडिया में कैवियेट भी दाखिल की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह बार की गरिमा, अनुभव और संस्थागत मजबूती को लेकर गंभीर हैं।
अधिवक्ताओं के एक बड़े वर्ग में यह मुद्दा खासा प्रभाव छोड़ता दिखाई दे रहा है और यह मनोज भाटी के लिए चुनावी रूप से काफी मुफीद साबित हो सकता है।
सचिव पद पर भी कांटे की टक्कर
सचिव पद के लिए शोभाराम चंदीला दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं और उन्हें भी व्यापक सहानुभूति मिलती नजर आ रही है। उनके कार्यकाल के अनुभव को उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है।
वहीं सत्येंद्र नागर एडवोकेट और एडवोकेट नीरज भाटी भी सचिव पद के लिए पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रहे हैं और अपने-अपने जीत के दावे पेश कर रहे हैं। सचिव पद पर यह मुकाबला त्रिकोणीय बनता जा रहा है।
कल तय होगा अधिवक्ताओं का नेतृत्व
अब सबकी निगाहें 24 दिसंबर 2025 के मतदान पर टिकी हैं। यह चुनाव केवल पदाधिकारियों का चयन नहीं करेगा, बल्कि यह तय करेगा कि गौतमबुद्धनगर बार आने वाले वर्षों में अनुभव, संघर्ष और संस्थागत मजबूती के किस रास्ते पर आगे बढ़ेगी।
कुल मिलाकर यह चुनाव अधिवक्ता हितों और बार की भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित होने जा रहा है।