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कवि अमित शर्मा ने विदेशी धरती क़तर में भारतीय संस्कृति की छटा बिखेरी


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
भारतीय साहित्य जगत के गौरवशाली प्रतिनिधि कवि अमित शर्मा की हाल ही में सम्पन्न हुई क़तर काव्य यात्रा ऐतिहासिक रूप से सफल रही। इस अवसर पर प्रवासी भारतीयों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय साहित्य-प्रेमियों ने उत्साह और आत्मीयता के साथ भाग लिया।

कविताओं में राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाएँ

कार्यक्रम का संचालन स्वयं कवि अमित शर्मा ने किया। उनकी प्रभावशाली कविताओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनकी काव्य-धारा में जहाँ राष्ट्रप्रेम की ऊष्मा थी, वहीं मानवीय संवेदनाओं का कोमल स्पर्श भी झलकता रहा। क़तर की धरती पर गूँजे उनके शब्दों ने भारतीय संस्कृति की सुगंध बिखेरते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय कविता की गरिमा को और ऊँचाई प्रदान की।

ग्रेटर नोएडा के सैनी गाँव निवासी कवि अमित शर्मा की यह प्रस्तुति प्रवासी भारतीयों के लिए गर्व और आत्मीयता का अद्भुत संगम साबित हुई।

तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजा सभागार

नॉर्थ इंडियंस एसोसिएशन क़तर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सभागार बार-बार तालियों से गूंजता रहा। श्रोताओं ने कवि की रचनाओं को “आत्मा से जुड़ा अनुभव” बताते हुए कहा कि यह आयोजन उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों में दर्ज रहेगा।

सेलेब्री कवियों की विशेष मौजूदगी

कार्यक्रम में “द ग्रेट इंडियन लाफ़्टर चैलेंज” के विनर और प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेश अलबेला ने अपनी प्रस्तुतियों से देर तक प्रवासी भारतीयों को ठहाकों से सराबोर कर दिया।
वहीं राजस्थान की कवयित्री आयुषी राखेचा ने अपने गीतों के माध्यम से श्रोताओं के हृदय पर अमिट छाप छोड़ी।

अमित शर्मा का भावुक उद्बोधन

अपने उद्बोधन में कवि अमित शर्मा ने कहा—
“यह मेरे लिए अविस्मरणीय अनुभव है। क़तर की पावन भूमि पर अपनी मातृभूमि भारत की कविताओं का स्वर पहुँचाना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। इस यात्रा की सफलता केवल व्यक्तिगत गर्व नहीं, बल्कि पूरे भारतीय साहित्य जगत का सम्मान है।”

अध्यक्ष ललित पाण्डेय का वक्तव्य

नॉर्थ इंडियंस एसोसिएशन क़तर के अध्यक्ष ललित पाण्डेय ने बताया कि इतने लंबे समय बाद यहाँ हिन्दी कवि सम्मेलन हुआ है। उन्होंने कहा कि “अश्लीलता और सतही मनोरंजन के इस दौर में ऐसा स्वस्थ और सांस्कृतिक आयोजन उम्मीद से कहीं अधिक सफल रहा।”

सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूती

यह काव्य यात्रा न केवल साहित्यिक दृष्टि से ऐतिहासिक रही, बल्कि भारत और क़तर के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को और भी मज़बूत बनाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।