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बिसरख धाम में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव


आचार्य अशोकानंद जी महाराज / रावण जन्म स्थली बिसरख धाम, गौतमबुद्धनगर 
भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर 16 अगस्त 2025, शनिवार को श्री मोहन दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट, बिसरख धाम परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव बड़े हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ।

महामण्डलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज (पीठाधीश्वर, बिसरख धाम) के दिशा-निर्देश एवं आशीर्वाद में आयोजित इस महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।


कब और कैसे मनाई गई जन्माष्टमी?

पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:49 बजे प्रारंभ होकर 16 अगस्त की रात 9:24 बजे समाप्त हुई। चूंकि इस वर्ष अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाया था, इसलिए महामण्डलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज ने उदय तिथि के आधार पर 16 अगस्त 2025 को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने की घोषणा की।

श्रद्धालुओं ने 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12:25 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

  • पूजा मुहूर्त : 16 से 17 अगस्त की मध्यरात्रि 12:04 से 12:47 बजे तक
  • व्रत पारण : 17 अगस्त की सुबह 05:51 बजे
  • चंद्रोदय : 16 अगस्त की रात 11:32 बजे

भजन-कीर्तन और दही-हांडी की धूम

मंदिर परिसर में प्रातः 11 बजे से लेकर रात्रि 11 बजे तक भजन-कीर्तन आयोजित हुए। विभिन्न भजन मंडलियों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं और भक्तगण भक्ति रस में झूमते रहे।

रात्रि 12 बजे दही-हांडी कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके पश्चात रात्रि 12:45 बजे व्रत पारण और प्रसाद वितरण सम्पन्न हुआ।



भगवान कृष्ण की पूजा-विधि

श्रद्धालुओं ने भगवान को पंचामृत स्नान, भव्य श्रृंगार और 56 भोग अर्पित किए। भक्तों ने संकल्पपूर्वक उपवास रखा और नाम-जप व भजन में रमे रहे। पूजा-अर्चना के दौरान दूध, दही, घी, शहद, तुलसी पत्ते और पंजीरी का विशेष महत्व रहा।


आयोजन समिति और प्रमुख हस्तियाँ

इस आयोजन की व्यवस्था में कार्यक्रम प्रबंधक के रूप में रामवीर शर्मा (उपाध्यक्ष), संदीप शर्मा (सचिव), गोपाल शर्मा (सहसचिव), एडवोकेट जी.डी. आर्य (कोषाध्यक्ष), उदयवीर भाटी, पूरण गौतम, नरेन्द्र भाटी और नरेश भाटी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सम्पूर्ण आयोजन महामण्डलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज के आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ, जिन्हें इस महोत्सव का संरक्षक एवं प्रेरणा स्रोत माना गया।


भक्तिमय वातावरण

पूरे दिन मंदिर परिसर भक्ति और उल्लास से गूंजता रहा। श्रद्धालु भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की झलकियों, भजनों और आरती में लीन होकर दिव्य आनंद में सराबोर हो गए।



🕉️ कानूनी अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित तिथियां, मुहूर्त और धार्मिक मान्यताएं पंचांग एवं आचार्य अशोकानंद जी महाराज (बिसरख धाम) के वक्तव्यों पर आधारित हैं। पाठकों से निवेदन है कि धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत संबंधी निर्णय अपनी आस्था एवं पारिवारिक परंपराओं के अनुसार लें।