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रक्षाबंधन: भाई-बहन के अटूट बंधन का पर्व



✍️ लेखक: चौधरी शौकत अली चेची
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, किसान एकता (संघ) एवं सचिव, पिछड़ा वर्ग उत्तर प्रदेश (सपा) 


रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पावन पर्व है, जो केवल भाई-बहन के प्रेम, समर्पण और सुरक्षा के वचन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक, धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह पर्व 9 अगस्त (शनिवार) को भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा।


🪢 रक्षाबंधन मनाने का मुख्य उद्देश्य – मुख्य बिंदुओं में समझें:

  1. भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती
    इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उन्हें जीवनभर रक्षा का वचन देता है।

  2. धार्मिक महत्व
    पौराणिक कथाओं के अनुसार यह पर्व रक्षा कवच, विजय, वचन, और आस्था का प्रतीक है।

  3. सांस्कृतिक एकता
    यह पर्व केवल हिंदू धर्म ही नहीं, अन्य समुदायों और संस्कृति में भी भाईचारे का संदेश देता है।

  4. ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ाव
    राजपूत रानियों से लेकर मुगलों तक, अनेक ऐतिहासिक घटनाओं में रक्षाबंधन की परंपरा झलकती है।

  5. सामाजिक सौहार्द
    यह पर्व जाति, धर्म, वर्ग के भेद को मिटाकर सबको जोड़ता है।


🏰 रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ:

🔸 राजस्थान से हुई शुरुआत

राजपूत महिलाएं युद्ध पर जाने वाले योद्धाओं की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती थीं। उन्हें विश्वास था कि यह धागा उनके पति, पुत्र या भाई को युद्ध में विजय दिलाएगा।

🔸 रानी कर्णवती और हुमायूं

चित्तौड़गढ़ की रानी कर्णवती ने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर भाई का दर्जा दिया। हुमायूं ने भाई का धर्म निभाते हुए उनके पुत्र विक्रमजीत सिंह को शासक बनाकर वचन निभाया।

🔸 रविंद्रनाथ टैगोर की अपील

बंग भंग के विरोध में टैगोर ने इस पर्व को राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का प्रतीक बनाकर लोगों को राखी बांधने के लिए प्रेरित किया।

🔸 श्रीकृष्ण और द्रौपदी

महाभारत में द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली से बहते रक्त को अपनी साड़ी फाड़कर बांधा था। श्रीकृष्ण ने बहन मानकर उनकी लाज भरी सभा में बचाई।

🔸 इंद्र-इंद्राणी कथा

देव-दानव युद्ध में इंद्राणी ने इंद्र को अभिमंत्रित रक्षा सूत्र बांधा, जिससे इंद्र की विजय हुई और रक्षाबंधन पर्व का प्रारंभ हुआ।

🔸 सिकंदर और राजा पूरू

सिकंदर की पत्नी ने पूरू को राखी बांधी थी। पूरू ने युद्ध में सिकंदर को न मारने का वचन निभाकर भाई होने का धर्म निभाया।

🔸 राजा बलि और महालक्ष्मी

राजा बलि को लक्ष्मीजी ने रक्षा सूत्र बांधा, बदले में विष्णु भगवान को अपने साथ ले जाने का वचन लिया – इस कथा में भी भाई-बहन का संबंध दर्शाया गया है।


🌕 ज्योतिषीय महत्व व मान्यता

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से नकारात्मक ग्रह दोषों की शांति होती है। महर्षि द्वारसा ने इसे ग्रह दृष्टि निवारण हेतु उपयुक्त बताया है। इस दिन विशेषकर बागवती देवी की पूजा, कजरी पूर्णिमा, और वैदिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है।


💡 समाज को मिलने वाला संदेश:

  • प्रेम, त्याग और विश्वास का प्रतीक।
  • धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं से जोड़ता है।
  • भाई-बहन के रिश्ते को नई ऊर्जा देता है।
  • सभी जाति, धर्म, संप्रदाय के लोगों को जोड़ने का अवसर।

📅 रक्षाबंधन 2025 का मुहूर्त:

🔹 श्रावण पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त 2025, दोपहर 2:12 बजे से
🔹 समापन: 9 अगस्त 2025, दोपहर 1:24 बजे तक
🔹 राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: 9 अगस्त, शनिवार (भद्रा रहित)



💌 समापन संदेश

"बहना ने भाई की कलाई में प्यार बांधा है, रेशम की डोरी से संसार बांधा है।"

इस रक्षाबंधन, आइए हम सब मिलकर संकल्प लें – अपने परिवार, समाज और देश की रक्षा के लिए, एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनने के लिए, और भाईचारे, शांति व एकता को बढ़ावा देने के लिए।


📜 कानूनी अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख सामाजिक, धार्मिक और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है, जो विभिन्न शास्त्रों, ग्रंथों और जनश्रुतियों से संकलित की गई जानकारी पर आधारित है। इस लेख का उद्देश्य जनमानस को त्योहार के महत्व से अवगत कराना है, न कि किसी विशेष धार्मिक विचारधारा या ऐतिहासिक मत पर अंतिम सत्य स्थापित करना। पाठकों से आग्रह है कि वे अपनी श्रद्धा और मान्यताओं के अनुसार जानकारी का प्रयोग करें।