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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि एवं बिसरख धाम महोत्सव का भव्य आयोजन

महामण्डलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज, पीठाधीश्वर बिसरख धाम के अनुसार


ॐ श्री कृष्ण वासुदेवाय नमः

ॐ बाबा मोहन देवाय नमः



 भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, हिंदू पंचांग में एक अत्यंत पावन और शुभ अवसर के रूप में मानी जाती है। यही वह दिन है जब जगतपालक भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा नगरी में माता देवकी और वासुदेव के घर अवतार लिया। जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भक्ति, उत्साह, प्रेम और अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव है।

इस वर्ष, भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव देश और विदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। बिसरख धाम, जो अपनी आध्यात्मिक महिमा और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए विख्यात है, यहां इस पर्व का आयोजन विशेष भव्यता के साथ होगा।

महामण्डलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज का कहना है कि इस वर्ष अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा, अतः पंचांग और परंपरा के अनुसार उदय तिथि को मान्यता देते हुए 16 अगस्त 2025, शनिवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।


कृष्ण जन्माष्टमी 2025: पंचांग अनुसार तिथि और समय

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ – 15 अगस्त 2025, रात्रि 11:49 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त – 16 अगस्त 2025, रात्रि 09:24 बजे
  • रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ – 17 अगस्त 2025, प्रातः 04:38 बजे
  • चंद्रोदय का समय – 16 अगस्त 2025, रात्रि 11:32 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त – 16 से 17 अगस्त की मध्यरात्रि 12:04 बजे से 12:47 बजे तक
  • मध्यरात्रि का शुभ क्षण – 16 से 17 अगस्त की मध्यरात्रि 12:25 बजे
  • व्रत पारण का समय – 17 अगस्त 2025, प्रातः 05:51 बजे

ध्यान दें: जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का मेल न हो, तो उदय तिथि (जिस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी हो) को पर्व मनाना शास्त्रसम्मत माना जाता है।


जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का प्रत्येक पहलू—चाहे वह माखन चोरी हो, गीता का उपदेश हो या महाभारत का धर्म-युद्ध—मानवता को धर्म, प्रेम और कर्तव्य की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

शास्त्रीय मान्यता:

  • श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था, किंतु उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, धर्म का पालन सर्वोपरि है।
  • उनका जीवन कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग का अद्भुत संगम है।
  • जन्माष्टमी का व्रत और पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।


पूजा-विधि (Step-by-Step)

1. व्रत और शुद्धिकरण

  • सूर्योदय से पूर्व स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत का संकल्प लें और दिनभर फलाहार या जलाहार करते हुए भगवान के नाम का स्मरण करें।

2. पूजन सामग्री एकत्र करें

  • दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल
  • तुलसी पत्ते, मिश्री, पंजीरी, माखन
  • पीले कपड़े, फूलमाला, धूप, दीप, घंटी
  • बाल गोपाल की प्रतिमा या चित्र

3. पूजा स्थल की सजावट

  • पीला वस्त्र बिछाकर सुंदर चौकी सजाएं।
  • चौकी पर बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें।
  • आस-पास फूल, दीपक और धूप की व्यवस्था करें।

4. अभिषेक और श्रृंगार

  • भगवान का पंचामृत से स्नान कराएं (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)।
  • इसके बाद गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • फूलमालाएं पहनाएं, पीतांबर और आभूषणों से श्रृंगार करें।

5. भोग अर्पण

  • माखन, मिश्री, पंजीरी, फल, मिठाई और 56 भोग अर्पित करें।
  • तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।

6. मंत्र-जाप और भजन

  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
  • रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव का उल्लास मनाएं, शंख-घंटियों से वातावरण गुंजायमान करें।


बिसरख धाम का भव्य आयोजन

कार्यक्रम तिथि और समय

  • तारीख: 16 अगस्त 2025, शनिवार
  • स्थान: श्री मोहन दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट, बिसरख धाम

कार्यक्रम क्रम

  • भजन-कीर्तन: प्रातः 11:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक
  • दही-हांडी: रात्रि 12:00 बजे
  • व्रत पारायण: रात्रि 12:45 बजे
  • प्रसाद वितरण: रात्रि 12:45 बजे से

विशेष: कोई भी भक्त अपनी भजन मंडली के साथ कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकता है।



ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ

बिसरख धाम का नाम महाभारत कालीन बिसरखा गाँव से जुड़ा है, जो पांडवों और कौरवों के समय का एक ऐतिहासिक स्थल माना जाता है। यहां जन्माष्टमी का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सामुदायिक और सांस्कृतिक मिलन का अवसर भी है।


व्रत के लाभ

  • मानसिक शांति और एकाग्रता
  • पारिवारिक सुख-समृद्धि
  • स्वास्थ्य और ऊर्जा में वृद्धि
  • पापों का क्षय और मोक्ष की प्राप्ति

भक्तों के लिए विशेष निर्देश

  1. व्रत करते समय सात्विक आहार लें।
  2. मोबाइल और अन्य व्याकुल करने वाली चीजों से दूर रहकर भक्ति पर ध्यान दें।
  3. रात्रि में जागरण करें और यथाशक्ति भजन-कीर्तन में भाग लें।

कानूनी डिस्क्लेमर

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई तिथि, समय और पंचांग संबंधी जानकारी पारंपरिक हिंदू पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और महामण्डलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज के दिशानिर्देशों पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और संप्रदायों में मान्यताओं के अनुसार तिथियों और मुहूर्तों में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत का पालन करने से पहले अपने क्षेत्र के विद्वान पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श करना उचित होगा। आयोजकों और लेखक का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक और धार्मिक जानकारी प्रदान करना है; किसी भी प्रकार की धार्मिक, आध्यात्मिक या व्यक्तिगत हानि-लाभ के लिए यह उत्तरदायी नहीं हैं।



 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला है—जहां प्रेम, भक्ति, साहस और धर्म का संगम होता है। बिसरख धाम में होने वाला यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को प्रबल करेगा, बल्कि समाज में एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक विरासत को भी सुदृढ़ करेगा।