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रक्षाबंधन 2025 विशेष: भाई-बहन के प्रेम का अद्भुत पर्व और शुभ मुहूर्त ?


रक्षाबंधन 2025 विशेष: भाई-बहन के प्रेम का अद्भुत पर्व और शुभ मुहूर्त की संपूर्ण जानकारी


श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज, पीठाधीश्वर बिसरख धाम ने बताया कि रक्षाबंधन हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पावन और भावनात्मक पर्व है, जो भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है। यह पर्व न केवल भारतीय संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है, बल्कि परिवारिक मूल्यों और प्रेम, स्नेह, त्याग, और सुरक्षा के आदर्शों को भी उजागर करता है। रावण जन्म स्थली, पावन बिसरख धाम से महामंडलेश्वर जी ने वर्ष 2025 में रक्षाबंधन की तिथि, शुभ मुहूर्त, भद्रा काल तथा इस पर्व की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला।



🕉️ रक्षाबंधन का महत्व

हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भाई और बहन के रिश्ते की आत्मीयता, समर्पण और संरक्षण का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी (रक्षासूत्र) बांधकर उनके दीर्घायु, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं। बदले में भाई जीवनभर बहन की रक्षा और सम्मान का वचन देता है।

यह पर्व एक भावनात्मक डोर में सिर्फ रक्त संबंधी भाई-बहनों को नहीं, बल्कि राखी बांधकर बनाए गए सांस्कृतिक और आत्मीय रिश्तों को भी जोड़ता है। रक्षाबंधन भारतीय समाज में सामाजिक सौहार्द, धार्मिक विश्वास और संस्कारों की परंपरा को जीवंत बनाए रखता है।



📅 रक्षाबंधन 2025 में कब है?

महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज के अनुसार, वर्ष 2025 में रक्षाबंधन का पर्व शनिवार, 9 अगस्त को मनाया जाएगा। यह तिथि श्रावण पूर्णिमा के दिन पड़ रही है, जो रक्षाबंधन के पर्व के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त 2025, दोपहर 2:12 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 9 अगस्त 2025, दोपहर 1:24 बजे

चूंकि उदयातिथि (सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि) 9 अगस्त को पूर्णिमा रहेगी, इसलिए रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को ही मनाया जाएगा



राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

राखी बांधने का कार्य हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए, जिससे भाई-बहन दोनों को शुभ फल प्राप्त होते हैं।

🔸 रक्षा बंधन अनुष्ठान मुहूर्त:
सुबह 5:56 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक

🔸 प्रदोष काल में राखी बांधने का समय:
शाम 7:19 बजे से रात 9:24 बजे तक

यदि किसी कारणवश दिन में राखी न बांधी जा सके, तो प्रदोष काल में भी राखी बांधना शास्त्रसम्मत और शुभ होता है।



🚫 भद्रा काल और उसका प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार, भद्राकाल के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। विशेषकर रक्षासूत्र (राखी) बांधना भद्राकाल में निषिद्ध है क्योंकि यह समय राक्षसी प्रभावों वाला माना गया है।

🔹 भद्राकाल समाप्ति:
9 अगस्त 2025 को सुबह 1:52 बजे

इसलिए, 9 अगस्त के सूर्योदय के समय भद्रा समाप्त हो चुकी होगी, जिससे पूरे दिन भद्राकाल का साया नहीं रहेगा, और राखी बांधने के लिए पूरा दिन शुभ रहेगा।



🌼 रक्षाबंधन की परंपराएं

  • बहनें पूजा की थाली सजाकर उसमें रोली, चावल, दीपक, मिठाई और राखी रखती हैं।
  • भाई की आरती उतारकर, माथे पर तिलक करती हैं और दाहिने हाथ पर राखी बांधती हैं।
  • इसके बाद मिठाई खिलाकर आशीर्वाद एवं उपहारों का आदान-प्रदान होता है।
  • कई बहनें उपवास भी रखती हैं और रक्षाबंधन के दिन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना और व्रत करती हैं।


🔱 आध्यात्मिक संदेश

महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज ने रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर देशवासियों और समस्त मातृशक्ति को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि आत्मीयता, सुरक्षा, जिम्मेदारी और विश्वास की नींव है।

आचार्य जी ने बताया कि जिस प्रकार एक बहन अपने भाई की मंगलकामना के लिए रक्षासूत्र बांधती है, उसी प्रकार हमें भी समाज में एक-दूसरे की रक्षा और सहयोग का संकल्प लेना चाहिए।

भविष्य में भी यह पर्व हमें एकता, सहिष्णुता और प्रेम का पाठ पढ़ाता रहे, यही भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना है।



🙏 रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

🌺 रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
भगवान शिव आप सभी पर कृपा करें, सभी बहनों की झोली खुशियों से भरी रहे और सभी भाइयों को बल, बुद्धि, यश और विजय प्राप्त हो।

ॐ नमः शिवाय
जय श्री रक्षाबंधन



आपका शुभाकांक्षी
श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर आचार्य अशोकानंद जी महाराज
पीठाधीश्वर – बिसरख धाम (रावण जन्म स्थली)
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